मुरैना। Supreme Court of India ने राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों के संचालन पर मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन रोकने के लिए राज्यों की कार्रवाई नाकाफी है और बिना नंबर प्लेट वाले वाहन खुलेआम रेत परिवहन कर रहे हैं। जस्टिस Vikram Nath और Sandeep Mehta की बेंच ने 6 महीने के भीतर निगरानी तंत्र विकसित करने, CCTV कैमरे लगाने और अवैध खनन में इस्तेमाल वाहनों की जब्ती के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन अब केवल कानून उल्लंघन नहीं, बल्कि पर्यावरण विनाश, वन्यजीवों के आवास खत्म होने और संगठित अपराध का मामला बन चुका है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने “organized illegal mining network” शब्द का इस्तेमाल करते हुए प्रशासनिक सुस्ती पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल अदालत के दबाव में होने वाली औपचारिक कार्रवाई नहीं हो सकती, बल्कि यह राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारी है। अदालत ने मुरैना-धौलपुर बॉर्डर स्थित NH-44 पुल के पास हो रहे अवैध उत्खनन पर भी चिंता जताई और National Highways Authority of India को हाई-रेजोल्यूशन CCTV लगाने के निर्देश दिए। साथ ही चंबल नदी में कचरा फेंकने वालों पर सख्त कार्रवाई, वन विभाग में खाली पद भरने और स्थानीय युवाओं को वैकल्पिक रोजगार से जोड़ने के निर्देश भी दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार से 29 मई तक जवाब मांगा है, जबकि मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को होगी।
चंबल में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, MP समेत 3 राज्यों को लगाई फटकार




