दिल्ली में रविवार को एक दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के नजदीक सत्य निकेतन इलाके में एक पुरानी पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। इस भयावह हादसे में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राहत और बचाव दल मलबे के नीचे दबे अन्य लोगों की तलाश में लगातार जुटे हुए हैं।
सत्य निकेतन की एक संकरी गली में स्थित यह इमारत लंबे समय से लड़कों के छात्रावास के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी। करीब तीन दशक पुरानी इस इमारत के अचानक ढहने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
CCTV में कैद हुआ खौफनाक मंजर
इमारत गिरने का एक सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है। फुटेज में देखा जा सकता है कि कुछ ही पलों में पूरी इमारत धराशायी हो जाती है और आसपास का इलाका धूल के घने गुबार में ढक जाता है।
जो लोग उस समय आसपास मौजूद थे, उनके लिए यह दृश्य किसी खौफनाक सपने से कम नहीं था। इमारत के गिरते ही लोगों की चीख-पुकार गूंज उठी और आसपास के लोग मदद के लिए दौड़ पड़े।
मलबे में दबे लोगों की तलाश, हर पल बढ़ रही चुनौती
हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। एनडीआरएफ की टीमें बेहद सावधानी के साथ मलबा हटा रही हैं, क्योंकि आशंका है कि अभी भी कुछ लोग उसके नीचे फंसे हो सकते हैं।
दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि बचाव अभियान बेहद संवेदनशील परिस्थितियों में चल रहा है। उनके अनुसार, ढही हुई इमारत के पास मौजूद दूसरी पुरानी इमारत भी खतरे की स्थिति में है।
उन्होंने कहा कि राहतकर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबा हटाने के साथ-साथ आसपास की कमजोर इमारतों को सुरक्षित रखना है। किसी भी जल्दबाजी से एक और बड़ा हादसा हो सकता है।
मजदूरों के फंसे होने की भी आशंका
सरकार के मुताबिक, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हादसे के समय इमारत के भीतर कितने लोग मौजूद थे। आशंका जताई जा रही है कि कुछ मजदूर भी वहां काम कर रहे हो सकते थे और वे मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं।
राहत दल लगातार हर हिस्से की जांच कर रहे हैं। मलबे के नीचे जिंदगी की कोई आहट मिलने की उम्मीद में बचाव अभियान जारी है।
बेसमेंट में काम को लेकर उठे सवाल
प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि इमारत काफी पुरानी थी और उसके बेसमेंट में कुछ काम किया जा रहा था। आशंका जताई जा रही है कि इसी काम के कारण इमारत की संरचना कमजोर हुई और वह अचानक ढह गई।
हालांकि, हादसे की असली वजह की जांच अभी की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
दोषियों पर कार्रवाई का ऐलान
दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने हादसे पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार लोगों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।
उन्होंने चार मंजिल से अधिक ऊंचाई वाले अवैध निर्माणों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कदम उठाने की बात कही है।
वहीं मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी संकेत दिए कि मामले में जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी को जवाबदेही से बचने नहीं दिया जाएगा।
बगल की पुरानी इमारत भी खाली कराई गई
हादसे के बाद प्रशासन ने पास स्थित एक अन्य पुरानी इमारत को भी खाली करा दिया है। बताया जा रहा है कि यह इमारत भी काफी पुरानी है और इसे लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं।
लेकिन फिलहाल प्रशासन के सामने प्राथमिकता मलबे में दबे लोगों को तलाशना और बचाव अभियान को सुरक्षित तरीके से पूरा करना है।
सत्य निकेतन की उस संकरी गली में रविवार को जहां रोजमर्रा की जिंदगी सामान्य थी, वहां अब सिर्फ मलबा, धूल और मातम पसरा हुआ है। छह लोगों की मौत ने कई परिवारों को गहरा जख्म दिया है, जबकि बचावकर्मी अब भी टूटे हुए ढांचे के बीच जिंदगी की तलाश कर रहे हैं।
हर गुजरते घंटे के साथ लोगों की निगाहें राहत अभियान पर टिकी हैं और सवाल भी उठ रहा है कि आखिर इस दर्दनाक त्रासदी का जिम्मेदार कौन है।




