नई दिल्ली। महज 13 रुपये का भुगतान करने के नाम पर एक व्यक्ति के खाते से करीब 1.99 लाख रुपये उड़ाने वाले साइबर ठगी नेटवर्क का दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने खुलासा किया है। मामले की जांच करते हुए पुलिस ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर, हरदोई और लखीमपुर खीरी में कार्रवाई कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आशीष कुमार (24), अमित कुमार (23) और उमेश चंद (37) के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर साइबर ठगों को कमीशन के बदले बैंक खाते, CSC वॉलेट और मोबाइल सिम उपलब्ध कराते थे।
13 रुपये भरने के लिए भेजा लिंक, क्लिक करते ही खाते से उड़े लाखों
पुलिस के अनुसार, पीड़ित के साथ ठगी की घटना 18 जुलाई को हुई थी। कॉल करने वाले ने खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताया और बिजली से जुड़े भुगतान के नाम पर केवल 13 रुपये जमा करने की बात कही। इसके बाद पीड़ित को एक लिंक भेजा गया।
जैसे ही पीड़ित ने लिंक पर कार्रवाई की, उसके बैंक खाते से करीब 1.99 लाख रुपये निकाल लिए गए। शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस ने डिजिटल ट्रेल खंगालना शुरू किया।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम भुगतान प्लेटफॉर्म PayU के जरिए ‘आशीष कुमार जनसेवा केंद्र’ नाम के CSC मर्चेंट अकाउंट तक पहुंची थी। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले आशीष कुमार को हिरासत में लिया।
पूछताछ में खुलती गई ठगी नेटवर्क की परतें
आशीष से पूछताछ के बाद पुलिस की जांच अमित कुमार और उमेश चंद तक पहुंची। पुलिस के मुताबिक, अमित कथित तौर पर CSC वॉलेट और मोबाइल नंबरों की व्यवस्था करता था, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी से जुड़े मामलों में किया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि अमित को उमेश को CSC वॉलेट उपलब्ध कराने के बदले 5 प्रतिशत कमीशन मिलता था। पूछताछ के दौरान उमेश ने कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़ी जानकारी रामदास नाम के व्यक्ति तक पहुंचाने की बात भी स्वीकार की।
पुलिस ने आरोपियों से जुड़े पांच बैंक खातों की जांच की है, जिनमें 2.50 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन का पता चला है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों के जरिए कितनी साइबर ठगी की रकम का लेनदेन हुआ और इस नेटवर्क से अन्य कौन-कौन लोग जुड़े हैं।
साइबर ठगी से ऐसे बचें
साइबर अपराधी अक्सर बिजली बिल, केवाईसी अपडेट, बैंक अकाउंट ब्लॉक होने या मामूली रकम जमा करने के नाम पर लोगों को फर्जी लिंक भेजते हैं।
- किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें।
- 13 रुपये या किसी छोटी रकम के भुगतान के नाम पर भेजे गए संदिग्ध लिंक से सावधान रहें।
- अनजान नंबर से भेजी गई APK फाइल डाउनलोड न करें।
- किसी को भी अपना बैंक OTP, PIN, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें।
- संदिग्ध कॉल या मैसेज मिलने पर संबंधित विभाग के आधिकारिक नंबर से जानकारी की पुष्टि करें।
ठगी हो जाए तो तुरंत करें ये काम
अगर आपके साथ साइबर फ्रॉड हो जाए तो देरी बिल्कुल न करें। तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत की जा सकती है।
साइबर मामलों में समय बेहद अहम होता है। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, ठगी की रकम को ट्रैक करने और उसे रोकने की संभावना उतनी अधिक हो सकती है।
फिलहाल दिल्ली साइबर पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और आरोपियों से जुड़े अन्य खातों व संदिग्ध लोगों की भूमिका खंगाल रही है।




