नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति पर हुए कथित जानलेवा हमले के मामले में दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। मामले में नामजद आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया है। पुलिस की यह कार्रवाई उस वायरल पॉडकास्ट क्लिप के बाद सामने आई, जिसमें आरोपी द्वारा कथित तौर पर पीड़ित पर हमला करने की बात स्वीकार किए जाने का दावा किया गया था।
मामला अब केवल मारपीट तक सीमित नहीं रहा है। गिरफ्तारी में देरी, कथित राजनीतिक संरक्षण और गंभीर धाराएं लगाए जाने की मांग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दूसरी तरफ स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थक भी उसके पक्ष में मैदान में उतर आए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
23 जून को जंतर-मंतर पर हुआ था विवाद
पुलिस के अनुसार, यह घटना 23 जून 2026 की है। उस दिन जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन चल रहा था। शिकायतकर्ता अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ वहां पहुंचे थे।
शाम करीब साढ़े पांच बजे शिकायतकर्ता अपने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद एक युवक से उनका विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद दो से तीन युवकों ने उन्हें घेर लिया और बेरहमी से हमला कर दिया।
सिर पर ठोस वस्तु से वार का आरोप, अस्पताल में कराया गया इलाज
पीड़ित की शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की और घूंसे बरसाए। आरोप है कि सिर पर लोहे के कड़े जैसी किसी ठोस वस्तु से भी हमला किया गया।
हमले में घायल होने के बाद पीड़ित को इलाज के लिए राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल ले जाया गया। मेडिकल रिपोर्ट में उनके सिर पर दो कटे हुए घाव दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।
FIR में दो आरोपी नामजद
पीड़ित की शिकायत पर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में FIR संख्या 62/2026 दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 126(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया।
शुरुआती जांच के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को इस मामले में नामजद किया गया था। अब स्वतंत्र को हिरासत में लिए जाने के बाद मामले की जांच एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
वायरल पॉडकास्ट ने बढ़ाई मुश्किलें
इस केस ने उस समय नया मोड़ लिया, जब सोशल मीडिया पर एक पॉडकास्ट की क्लिप तेजी से वायरल होने लगी। दावा किया गया कि क्लिप में स्वतंत्र भारद्वाज ने पीड़ित के सिर पर हमला करने की बात स्वीकार की।
क्लिप में राजनीतिक प्रभाव और कानूनी कार्रवाई से बच निकलने जैसे कथित दावों का भी जिक्र होने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया। हालांकि इन दावों की जांच पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों के स्तर पर होना बाकी है।
छात्रा की गुहार के बाद राहुल गांधी ने दिया सहयोग का भरोसा
पीड़ित की बेटी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और न्याय की मांग की। मामला सार्वजनिक होने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रा को सहयोग का भरोसा दिया।
इसके बाद कांग्रेस की कानूनी टीम पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंची। टीम ने मामले में और गंभीर धाराएं जोड़ने तथा आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। हेट स्पीच, एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम और अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों को शामिल करने की मांग भी उठाई गई।
CJP ने कार्रवाई का किया स्वागत, पुलिस पर उठाए सवाल
स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद CJP से जुड़े आशुतोष रांका ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का स्वागत किया, लेकिन साथ ही सवाल भी खड़े किए।
उनका कहना है कि संगठन घटना के बाद से लगातार आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा था और यह कदम काफी पहले उठाया जाना चाहिए था।
रांका ने आरोप लगाया कि गंभीर शिकायत दर्ज होने के बावजूद आरोपी लंबे समय तक खुलेआम घूमता रहा, सोशल मीडिया पर सक्रिय रहा और कथित तौर पर धमकियां भी देता रहा। उन्होंने वायरल पॉडकास्ट का हवाला देते हुए पूरे मामले की गहराई से जांच की मांग की।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आरोपी को किसी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण हासिल था या कार्रवाई में देरी के पीछे किसी तरह का दबाव था। साथ ही मामले में हत्या के प्रयास और एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य गंभीर धाराएं लगाए जाने की मांग भी की गई।
अब आरोपी के समर्थन में संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन
इस मामले में अब एक नया मोड़ सामने आया है। दूसरी ओर स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में भी लोग सड़कों पर उतर आए हैं। शनिवार को शिवम ठाकुर और दक्ष चौधरी के नेतृत्व में संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किए जाने की जानकारी सामने आई।
प्रदर्शनकारी स्वतंत्र भारद्वाज की रिहाई की मांग कर रहे हैं। उनका दावा है कि निशु आजाद द्वारा स्वतंत्र के खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने निशु आजाद पर हिंदू देवी-देवताओं के अपमान से जुड़े आरोप भी लगाए हैं।
जांच के बीच दो पक्ष आमने-सामने
जंतर-मंतर पर हुई कथित मारपीट की घटना अब कानून और राजनीति दोनों के केंद्र में आ गई है। एक तरफ पीड़ित पक्ष आरोपी के खिलाफ कड़ी धाराओं और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ आरोपी के समर्थक उसे निर्दोष बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
अब सबकी नजर दिल्ली पुलिस की आगे की जांच और इस मामले में होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी है। पुलिस जांच के बाद ही वायरल क्लिप, हमले के आरोपों और कथित राजनीतिक संरक्षण से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




