गाजियाबाद में रावण का पुतला बनाते समय धमाका, पुलिस की निगरानी पर सवाल; बारूद की खेप पहुंचने की होगी जांच

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गाजियाबाद/साहिबाबाद। लाजपत नगर स्थित सामुदायिक केंद्र में रावण का पुतला तैयार किए जाने के दौरान हुए जोरदार धमाके ने अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना को गंभीरता से लेते हुए डीसीपी ऋजुल ने स्थानीय पुलिस की भूमिका की जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले की जांच की जिम्मेदारी एसीपी इंदिरापुरम सूर्यबली मौर्य को सौंपी गई है।

जांच का सबसे अहम बिंदु यह है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री सामुदायिक केंद्र तक कैसे पहुंची। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि वहां बारूद रखने की अनुमति किसने दी थी और आयोजन स्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों को इसकी जानकारी थी या नहीं।

घटनास्थल के आसपास मौजूद थी पुलिस चौकी

धमाके वाली जगह और पुलिस चौकी के बीच की दूरी भी जांच का अहम हिस्सा बन गई है। सामुदायिक केंद्र से शनि चौक पुलिस चौकी करीब 100 मीटर की दूरी पर स्थित है। संबंधित थाना लगभग एक किलोमीटर और एसीपी कार्यालय करीब तीन किलोमीटर दूर है। ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में बारूद के पहुंचने और वहां उसके इस्तेमाल की जानकारी स्थानीय पुलिस को नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

डीसीपी के निर्देश के बाद पुलिस ने बीट इंचार्ज, चौकी प्रभारी और थाना प्रभारी सहित संबंधित पुलिसकर्मियों की ड्यूटी और रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है। यह भी देखा जा रहा है कि घटना से पहले इलाके में पुलिस की गश्त और निगरानी किस स्तर पर थी।

15 से 30 दिन में सौंपनी होगी रिपोर्ट

जांच अधिकारी को पुलिसकर्मियों की संभावित लापरवाही के साथ-साथ बारूद की पूरी सप्लाई चेन का पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि विस्फोटक सामग्री कहां से लाई गई, उसे किसके निर्देश पर रखा गया और इसके लिए किसी तरह की अनुमति ली गई थी या नहीं।

एसीपी सूर्यबली मौर्य को करीब 15 से 30 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट डीसीपी को सौंपनी है। यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही या कर्तव्य में चूक सामने आती है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

30 साल पुरानी रामलीला पर भी संकट

धमाके के बाद साहिबाबाद की करीब तीन दशक पुरानी रामलीला और दशहरा आयोजन भी सवालों के घेरे में आ गया है। हादसे के बाद रामलीला समिति और स्थानीय पार्षद के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। स्थानीय लोगों को आशंका है कि विवाद का असर वर्षों से चली आ रही रामलीला की परंपरा पर पड़ सकता है।

स्थानीय पार्षद हिमांशु ने सोमवार रात सोशल मीडिया पर लाइव आकर मामले को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने सामुदायिक केंद्र में कथित तौर पर पहुंची 56 बोरी बारूद का जिक्र करते हुए पूछा कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री वहां कैसे पहुंची। पार्षद की ओर से पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग किए जाने की बात भी सामने आई है।

पुलिस की निगरानी में रामलीला कराने की तैयारी

रामलीला समिति के अध्यक्ष विक्रम बैंसला के मुताबिक, आयोजन को लेकर जल्द बैठक बुलाई जाएगी। उनका कहना है कि आगे का मंचन पुलिस के दिशा-निर्देशों और सुरक्षा व्यवस्था के बीच कराया जाएगा। हादसे के बाद रावण के पुतले तैयार करने की प्रक्रिया और उससे जुड़े सुरक्षा इंतजामों पर भी समिति में चर्चा होगी।

वहीं, एसीपी साहिबाबाद अमित सक्सेना का कहना है कि फिलहाल मामले की जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही रामलीला और दशहरा आयोजन को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

करीब 10 टन बारूद मिलने का दावा

प्रारंभिक जांच में सामने आई जानकारी ने पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, बम निरोधक दस्ते की जांच के दौरान सामुदायिक केंद्र में करीब 10 टन बारूद मौजूद होने के संकेत मिले हैं। माना जा रहा है कि बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री होने के कारण धमाका इतना शक्तिशाली हुआ।

यह भी चर्चा है कि सामुदायिक केंद्र में तैयार किए जा रहे पटाखों की आपूर्ति दिवाली के दौरान कुछ व्यापारियों को की जानी थी। हालांकि इस पूरे मामले की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

अवैध पटाखा निर्माण पर भी उठे सवाल

घटना ने दिवाली से पहले अवैध रूप से पटाखे तैयार किए जाने की गतिविधियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों का दावा है कि लोनी के फरुखनगर इलाके में भी कथित तौर पर चोरी-छिपे पटाखे बनाने का काम चलता रहा है।

अब जांच का दायरा केवल सामुदायिक केंद्र में हुए धमाके तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर सकती है कि क्षेत्र में विस्फोटक सामग्री की अवैध आवाजाही या पटाखा निर्माण से जुड़ा कोई नेटवर्क सक्रिय तो नहीं है। हादसे के बाद पुलिस की निगरानी व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र की कार्यप्रणाली भी जांच के केंद्र में आ गई है।

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