नई दिल्ली। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े कथित अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क का दिल्ली कनेक्शन सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच और बंगाल एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में तीन दिन पहले हौजरानी से प्रदीप्त बसु को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, प्रदीप्त इस पूरे मॉड्यूल का मास्टरमाइंड है और पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क राजस्थान, पंजाब, दिल्ली और बंगाल तक फैला हुआ था। आरोप है कि नेटवर्क से जुड़े लोग भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर सैन्य प्रतिष्ठानों और प्रशासनिक कंट्रोल रूम से संवेदनशील सूचनाएं हासिल करने की कोशिश कर रहे थे।
बांग्लादेशी नागरिकों की आड़ में दिल्ली में छिपा था
क्राइम ब्रांच के डीसीपी संजीव कुमार यादव के अनुसार, मूलरूप से सिलीगुड़ी का रहने वाला प्रदीप्त बसु हौजरानी इलाके में बांग्लादेशी नागरिकों के साथ रह रहा था। पुलिस का आरोप है कि वह बांग्लादेशी नागरिकों को मेडिकल इलाज के बहाने दिल्ली लाता था और उनके रहने की व्यवस्था करता था। इसी गतिविधि की आड़ में वह कथित तौर पर जासूसी नेटवर्क को संचालित कर रहा था।
सीमा पर मनी एक्सचेंजर का काम, हवाला एंगल की भी जांच
पुलिस जांच में प्रदीप्त के भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र में मनी एक्सचेंजर के तौर पर काम करने की जानकारी भी सामने आई है। इसके बाद एजेंसियों को नेटवर्क में पैसों के लेनदेन और संभावित हवाला कनेक्शन का संदेह है। जांच अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि जासूसी नेटवर्क को आर्थिक मदद किस माध्यम से पहुंचाई जाती थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
आम लोगों के नाम पर सिम लेकर पाकिस्तान भेजने का आरोप
जांच में प्रदीप्त बसु के साथ उसके साथी समीर सरकार का नाम भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, दिल्ली में रहते हुए दोनों नेपाल के संदिग्ध नागरिक विशाल शाह के संपर्क में थे।
आरोप है कि गिरोह बंगाल के कूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर में आम लोगों के नाम पर भारतीय सिम कार्ड हासिल करता था। इसके बाद बांग्लादेशी एजेंट अकबर हुसैन की मदद से इन सिम कार्ड को ढाका और काठमांडू के रास्ते पाकिस्तान तक पहुंचाया जाता था।
भारतीय नंबरों से WhatsApp एक्टिवेट करने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, पाकिस्तान के रावलपिंडी, लाहौर और कराची में बैठे कथित ऑपरेटिव भारतीय सिम कार्ड पर आने वाले OTP का इस्तेमाल कर WhatsApp अकाउंट सक्रिय करते थे। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल पंजाब और राजस्थान सीमा पर तैनात अधिकारियों तथा विभिन्न कंट्रोल रूम से संवेदनशील सैन्य सूचनाएं जुटाने के लिए किया गया।
सात नामजद, तीन गिरफ्तार और चार फरार
बंगाल पुलिस की एफआईआर में इस कथित नेटवर्क से जुड़े सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें प्रदीप्त बसु को मास्टरमाइंड बताया गया है। बंगाल एसटीएफ पहले ही राशिदुल हक और नूरनासिरुद्दीन अली को गिरफ्तार कर चुकी है।
वहीं, मोहम्मद शफीकुल इस्लाम, अकबर हुसैन उर्फ सम्राट, उमर और नेपाल निवासी विशाल शाह अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। जांच एजेंसियां फरार आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
दिल्ली कनेक्शन की गहराई से जांच
क्राइम ब्रांच और बंगाल एसटीएफ अब प्रदीप्त बसु के दिल्ली में संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं। जांच का फोकस इस बात पर है कि उसने राजधानी में किन लोगों से मुलाकात की और क्या उसके संपर्क में कोई अन्य व्यक्ति भी इस कथित नेटवर्क का हिस्सा था।
एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नेटवर्क के जरिए देश की कोई रणनीतिक या सामरिक जानकारी वास्तव में सीमा पार भेजी गई थी या नहीं। देश की संप्रभुता और अखंडता से जुड़े संभावित खतरे को देखते हुए मामले में कानूनी धाराओं को और सख्त करने की प्रक्रिया भी चल रही है।




