नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के पालन को लेकर राज्यों की रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए अवैध कचरा ट्रांसपोर्ट और डंपिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने जिला कलेक्टरों से कहा है कि ऐसे वाहनों और उनके मालिकों या ऑपरेटरों की पहचान कर कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने हर जिले की वेबसाइट पर ठोस कचरा प्रबंधन के लिए अलग पेज बनाने का निर्देश दिया, जहां कचरा प्रबंधन की स्थिति, सुधार कार्य और पुराने कचरे की तस्वीरें अपलोड की जाएंगी। कोर्ट ने साफ कहा कि वर्षों से जमा पुराने कचरे के निपटारे की समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कचरा प्रबंधन नियमों की निगरानी के लिए केंद्र के पांच मंत्रालयों के सचिवों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को शामिल करते हुए एक मॉनिटरिंग कमेटी भी गठित की है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रेलवे से भी पूछा कि स्टेशन, ट्रैक और प्लेटफॉर्म से निकलने वाले कचरे के निपटारे के लिए क्या व्यवस्था है। कोर्ट ने कहा कि कचरा प्रबंधन केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि लोगों की आदतों में बदलाव से जुड़ा विषय है और इसके लिए स्कूलों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े अधिकारियों के तबादले पर भी रोक लगाने को कहा गया है, ताकि योजनाओं का काम प्रभावित न हो।
सुप्रीम कोर्ट सख्त, अवैध कचरा डंपिंग करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश




