संसद से सड़क तक संग्राम: मॉनसून सत्र के पहले दिन दिल्ली में प्रदर्शन, संसद में विपक्ष का हंगामा

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार को राजनीतिक गतिविधियां अपने चरम पर रहीं। एक ओर जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में प्रदर्शन और संसद मार्च का आयोजन किया गया, वहीं दूसरी ओर संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के जोरदार हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, सुरक्षा बलों से झड़प

सुबह से ही जंतर-मंतर क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटने लगे। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े।

संसद के दोनों सदनों में विपक्ष का विरोध

इधर संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत होते ही विपक्ष ने लोकसभा और राज्यसभा में सरकार को घेरना शुरू कर दिया। विपक्ष ने नीट परीक्षा पेपर लीक और अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से कथित चोरी के मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की।

लोकसभा में कार्यवाही प्रारंभ होते ही केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया के संबोधन के दौरान विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। लगातार हंगामे के कारण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।

उधर राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला है और सरकार उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। हंगामे के बीच राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।

दोपहर 12 बजे दोनों सदनों की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। लगातार व्यवधान के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना

संसद परिसर से निकलते समय कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत नहीं की, लेकिन बाद में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा कर सरकार पर तीखा हमला बोला।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि देश की सबसे बड़ी आबादी युवाओं की है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे छात्र अपराधी नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ पुलिस और सरकार का व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।

प्रियंका गांधी और खड़गे का सरकार पर हमला

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि विपक्ष शिक्षा नीति सहित छात्रों से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा चाहता है, लेकिन सरकार इस पर तैयार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं और उनके साथ बल प्रयोग किया जा रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद परिसर के बाहर कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं के समाधान के बजाय उन्हें दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से परीक्षाएं आयोजित नहीं कर सकती, तो उसे इसकी जिम्मेदारी किसी सक्षम संस्था को सौंप देनी चाहिए। खड़गे ने आरोप लगाया कि छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र पर सीधा हमला है। उन्होंने यह भी कहा कि मॉनसून सत्र में कथित “चंदा चोरी” का मुद्दा भी विपक्ष के प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेगा।

समाजवादी पार्टी का संसद से जंतर-मंतर तक मार्च

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने संसद परिसर के बाहर कहा कि सरकार विपक्ष और युवाओं की आवाज सुनने के बजाय उन्हें प्रताड़ित करने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में हुए पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि सरकार रोजगार देने से बच रही है क्योंकि इससे आरक्षण संबंधी प्रावधान लागू करने पड़ेंगे।

इसी बीच समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव के नेतृत्व में पार्टी सांसदों ने संसद से जंतर-मंतर तक मार्च निकाला। डिंपल यादव ने कहा कि देश के युवा अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन सरकार संवाद से बच रही है।

बाद में अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के सांसदों को पुलिस ने थाने में बैठाकर रखा, जिसे उन्होंने सरकार के अहंकार का उदाहरण बताया।

शशि थरूर और टीएमसी ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर कथित लाठीचार्ज को अनुचित बताते हुए कहा कि यदि प्रदर्शन अहिंसक था, तो बल प्रयोग का कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने कहा कि संसद जनता की समस्याओं और चिंताओं पर चर्चा का सर्वोच्च मंच है और ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर बहस होनी चाहिए।

वहीं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि सांसदों को जंतर-मंतर जाने से रोकने के लिए संसद परिसर के कुछ द्वार बंद कर दिए गए थे।

भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को बताया निराधार

भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि केंद्र सरकार नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय को उठाने का लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीका होता है तथा अराजकता फैलाना उचित नहीं है।

एनडीए सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि नीट पेपर लीक मामले में सरकार ने किसी भी प्रकार का पर्दा डालने की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द कर दोबारा निष्पक्ष तरीके से आयोजित की गई और यदि कहीं कोई कमी रह गई है तो उसे भी दूर किया जाएगा।

भाजपा सांसद एवं अभिनेत्री हेमा मालिनी ने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था या किसी अन्य विषय पर कोई समस्या है तो उसका समाधान संवाद और चर्चा के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने शिक्षा क्षेत्र और युवाओं के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं तथा केवल विरोध प्रदर्शन समाधान नहीं हो सकता।

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