नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 से पहले हुए भूमि अधिग्रहण मामलों में सोलाटियम और ब्याज देने से जुड़े अपने फैसले पर NHAI की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी, जिससे किसानों और जमीन मालिकों को बड़ी राहत मिली है; चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा कि जमीन अधिग्रहण में उचित मुआवजा पाना लोगों का संवैधानिक अधिकार है और इसे सरकार पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ से नहीं जोड़ा जा सकता; कोर्ट ने साफ किया कि जमीन मालिकों को ब्याज भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार 9% मिलेगा, जबकि NHAI इसे 5% तक सीमित रखना चाहता था और उसने तर्क दिया था कि इससे करीब 29 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, लेकिन कोर्ट ने इस आधार को स्वीकार नहीं किया; हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 2018 से पहले बंद हो चुके मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा, लेकिन जो मामले लंबित हैं, उनमें कानून के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा; दरअसल यह मामला 2019 के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने NHAI एक्ट की धारा 3J को असंवैधानिक करार दिया था और कहा था कि 1997 से 2015 के बीच अधिग्रहित जमीन के मालिकों को भी समान मुआवजा और लाभ मिलना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: किसानों को मिलेगा पूरा मुआवजा, NHAI की याचिका खारिज




