गाजियाबाद। डासना जेल से रिहा किए गए 30 वर्षीय मंदबुद्धि युवक गिरधर सिंह का शव मिलने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। शव की पहचान वैशाली निवासी गिरधर सिंह के रूप में होने पर परिवार ने हत्या की आशंका जताते हुए कौशांबी थाना पुलिस और जेल प्रशासन की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की। शनिवार रात बड़ी संख्या में लोग कौशांबी थाने पहुंच गए और जमकर हंगामा किया। मौके पर पहुंचे एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने लोगों को शांत कर निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। परिजनों का आरोप है कि मई में मारपीट के एक मामले में गिरधर को कौशांबी थाना पुलिस ने जेल भेजा था। बाद में जेल प्रशासन ने उसकी रिहाई की बात कही, लेकिन परिवार का कहना है कि उसे लेने कोई परिजन नहीं गया था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि युवक को किसकी सुपुर्दगी में छोड़ा गया और रिहाई के बाद वह कहां रहा। मृतक की मां देवकी ने बताया कि उनके पति का पहले ही निधन हो चुका है और वह स्वयं कैंसर से पीड़ित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इकलौते बेटे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है और शव को कहीं फेंका गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। शव का पोस्टमार्टम रविवार को कराया जाएगा।
जेल से रिहा मंदबुद्धि युवक का शव मिलने पर हंगामा, परिजनों ने हत्या की आशंका जताई




