नई दिल्ली। भारत में अपहरण और जबरन उठा ले जाने की घटनाओं में पिछले एक दशक के दौरान तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हाल ही में भोपाल में एक आईएएस अकादमी की निदेशक के अपहरण और 1.89 करोड़ रुपए की फिरौती के मामले ने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक वर्ष 1953 से 2024 तक देश में 20 लाख से अधिक अपहरण के मामले दर्ज हुए, जिनमें से 11.24 लाख केस यानी कुल मामलों का 54 प्रतिशत केवल 2013 से 2024 के बीच सामने आए। कुल अपराधों में अपहरण की हिस्सेदारी 1953-62 में 1.01 प्रतिशत थी, जो 2013-24 के दौरान बढ़कर 3.04 प्रतिशत तक पहुंच गई। आंकड़ों के अनुसार विवाह के लिए महिलाओं का अपहरण और सामान्य अपहरण सबसे बड़े कारण रहे, जबकि फिरौती के लिए संगठित अपहरण कुल मामलों का केवल 0.7 प्रतिशत है। राज्यवार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद बिहार पहले शीर्ष राज्यों में शामिल रहता था, लेकिन 2024 में वह शीर्ष छह राज्यों में सबसे नीचे पहुंच गया। वहीं बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों में भी गंभीर स्थिति सामने आई है। एनसीआरबी के अनुसार बच्चों से जुड़े करीब 90 प्रतिशत साइबर अपराध अश्लील कंटेंट के प्रकाशन या प्रसारण से जुड़े हैं। वर्ष 2024 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1,87,702 मामले दर्ज किए गए, जो 2023 के मुकाबले 5.8 प्रतिशत अधिक हैं।
देश में अपहरण के मामलों में बड़ा उछाल, पिछले 11 साल में दर्ज हुए 54% केस




