नई दिल्ली। सुप्रीम Court ने देशभर के हाईकोर्ट में लंबित जमानत याचिकाओं की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए कहा है कि बेल मामलों की जल्द सुनवाई और समयबद्ध निपटारे के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करना जरूरी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुझाव दिया कि पेंडिंग जमानत याचिकाओं की ऑटोमैटिक लिस्टिंग का सिस्टम बनाया जाए और उनके निपटारे की समय सीमा तय हो। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट, राज्य सरकारें और जांच एजेंसियां मिलकर ऐसा तंत्र विकसित करें जिससे मामलों का समय पर फैसला हो सके। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है और इस प्रक्रिया में पीड़ितों के अधिकारों की भी सुरक्षा होनी चाहिए। कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से लंबित नियमित और अग्रिम जमानत याचिकाओं का ब्यौरा मांगा था। सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट में सबसे अधिक लंबित जमानत मामलों पर विशेष चिंता जताई गई। अदालत ने यह भी कहा कि NDPS मामलों में समय पर FSL रिपोर्ट मिलना बेहद जरूरी है और जांच अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पीड़ितों को सुनवाई और कानूनी सहायता का पूरा अवसर मिले। सरकार के आंकड़ों के अनुसार देश के हाईकोर्ट में 63 लाख से अधिक मामले लंबित हैं।
जमानत याचिकाओं के बढ़ते बोझ पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित, हाईकोर्ट को मजबूत सिस्टम बनाने की सलाह




