रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 28 अप्रैल 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) रक्षा मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यह बैठक वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच आयोजित हो रही है, जिसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति और रणनीतिक सहयोग के दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है।
इस उच्चस्तरीय बैठक में एससीओ के सदस्य देशों के रक्षा मंत्री क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा सहयोग और उभरते खतरों पर व्यापक चर्चा करेंगे। विशेष रूप से आतंकवाद, उग्रवाद और सीमा पार सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके साथ ही, सदस्य देशों के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करने और संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा।
वर्तमान समय में पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य काफी जटिल हो गया है। ऐसे में एससीओ की यह बैठक और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। संगठन के सदस्य देश इस मंच के जरिए क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर विचार कर सकते हैं। साथ ही, मौजूदा संघर्षों के प्रभाव को कम करने के लिए साझा रणनीति तैयार करने की दिशा में भी पहल की जा सकती है।
बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारत की वैश्विक शांति और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूती से प्रस्तुत करेंगे। वे यह भी स्पष्ट करेंगे कि भारत आतंकवाद और चरमपंथ के खिलाफ “शून्य सहिष्णुता” की नीति पर अडिग है। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाता रहा है और इस बैठक में भी इसी दृष्टिकोण को प्रमुखता से रखा जाएगा।
इसके अलावा, राजनाथ सिंह कुछ प्रमुख देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं भी कर सकते हैं। इन वार्ताओं के जरिए भारत अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने तथा रक्षा सहयोग के नए अवसरों की तलाश करेगा। यह कदम भारत की ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ नीति और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 15 जून 2001 को शंघाई में हुई थी और यह आज क्षेत्र का एक प्रमुख राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा मंच बन चुका है। इसके सदस्य देशों में भारत, रूस, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं। यह संगठन एशिया और यूरोप के बड़े हिस्से को कवर करता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और भी बढ़ जाती है।
भारत वर्ष 2017 में एससीओ का पूर्ण सदस्य बना था और 2023 में उसने इसकी अध्यक्षता भी संभाली। भारत की सक्रिय भागीदारी ने संगठन में उसकी भूमिका को और मजबूत किया है। एससीओ के माध्यम से भारत न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा में योगदान दे रहा है, बल्कि आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग को भी नई दिशा दे रहा है।
कुल मिलाकर, बिश्केक में होने वाली यह बैठक भारत के लिए अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने, वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करने और बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह बैठक आने वाले समय में क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा ढांचे को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभा सकती है।




