नई दिल्ली। मई में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की ‘कॉकरोच’ टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा में आई। इसके बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अगर कॉकरोच कहे जा रहे युवा एकजुट हो जाएं तो क्या होगा?” इसी विचार से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत हुई। कुछ ही समय में पार्टी के इंस्टाग्राम पर 2.1 करोड़ फॉलोवर्स हो गए और नीट पेपर लीक को मुद्दा बनाकर सड़क पर आंदोलन शुरू किया गया। पार्टी बनने के करीब 70 दिनों के भीतर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया।
आंदोलन ने ‘कॉकरोच’ शब्द को अपनी पहचान बना लिया और जंतर-मंतर इसका प्रमुख केंद्र बना। इसे देश में अपनी तरह का पहला आंदोलन बताया गया। इस अभियान को आगे बढ़ाने में अभिजीत दीपके के साथ सोनम वांगचुक, सौरव दास और आशुतोष रांका की भी अहम भूमिका रही।
अभिजीत दीपके ने डिजिटल समर्थन को संगठित कर जमीनी आंदोलन का स्वरूप दिया। वहीं, शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। उनके जुड़ने के बाद प्रदर्शन को एक स्थायी मंच मिला और 28 जून से शुरू हुआ उनका अनशन आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गया। खोजी पत्रकार सौरव दास ने आंदोलन के प्रवक्ता के रूप में प्रदर्शनकारियों, सरकार और मीडिया के बीच समन्वय बनाए रखा, जबकि आशुतोष रांका ने आंदोलन की प्रमुख मांगों और एजेंडे को केंद्र में रखते हुए राजनीतिक दलों के प्रभाव से इसे अलग बनाए रखने का प्रयास किया।
आंदोलन के दौरान तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया गया। वेबसाइट और गूगल फॉर्म के जरिए स्वयंसेवकों की जानकारी जुटाई गई, जबकि इंस्टाग्राम और एक्स पर हैशटैग, वीडियो और पोस्ट के माध्यम से कार्यक्रमों और निर्देशों की जानकारी साझा की गई। रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज और क्षेत्रवार व्हाट्सऐप ग्रुप भी बनाए गए। इंटरनेट सेवाएं बाधित होने की स्थिति में प्रदर्शनकारियों ने आपसी संवाद के लिए ‘बिटचैट’ का इस्तेमाल किया।




