नई दिल्ली: देशभर में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के उग्र आंदोलन और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।
मंत्रालय के कामकाज में निरन्तरता बनाए रखने के उद्देश्य से राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। प्रह्लाद जोशी वर्तमान में खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय संभाल रहे हैं और नई व्यवस्था के तहत वे दोनों मंत्रालयों का कार्यभार देखेंगे।
तत्काल प्रभाव से लागू हुई अंतरिम व्यवस्था
राष्ट्रपति भवन से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह प्रशासनिक फेरबदल तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस अंतरिम व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य शिक्षा मंत्रालय के निर्णयों और दैनिक प्रक्रियाओं में किसी भी बाधा को रोकना है। मंत्रालय के स्थायी पुनर्गठन को लेकर निर्णय आने वाले समय में लिया जाएगा।
पद छोड़ने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने फैसले को युवाओं के प्रति सम्मान और राष्ट्रहित से जुड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि देश की सेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।
इस्तीफे के बाद राजनीतिक सुगबुगाहट तेज
इस्तीफे की पुष्टि होते ही धर्मेंद्र प्रधान के निवास पर वरिष्ठ नेताओं का पहुंचना शुरू हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, डॉ. जितेंद्र सिंह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत भाजपा व एनडीए के कई प्रमुख नेताओं ने उनसे मुलाकात की।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने धर्मेंद्र प्रधान के सार्वजनिक जीवन के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि छात्र राजनीति से लेकर केंद्रीय मंत्रिमंडल तक प्रधान का करियर युवाओं की आकांक्षाओं और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित रहा है।




