गुरुग्राम। शहर की पॉश कॉलोनियों में तोड़फोड़ अभियान के बाद फैले मलबे को लेकर डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर प्रवर्तन और नगर निगम के बीच टकराव की स्थिति बन गई है, जहां डीटीपीई ने नगर निगम से मलबा हटाने का आग्रह किया, वहीं निगम ने इसे अपनी जिम्मेदारी से बाहर बताते हुए साफ इनकार कर दिया, दरअसल पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर 18 से 22 अप्रैल के बीच कई लाइसेंसशुदा कॉलोनियों में अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की गई थी, जिसके बाद सड़कों और गलियों में भारी मात्रा में निर्माण व विध्वंस कचरा जमा हो गया, डीटीपीई का कहना है कि सड़कों का रखरखाव नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आता है इसलिए मलबा हटाना उसकी जिम्मेदारी है, जबकि नगर निगम ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि कचरा हटाने की जिम्मेदारी उसी की है जिसने इसे उत्पन्न किया है और इसे निर्धारित प्लांट तक पहुंचाना अनिवार्य है, इधर मलबा पड़े रहने से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है, कई जगह आरडब्ल्यूए को खुद पैसे खर्च कर कचरा उठवाना पड़ रहा है और धूल व गंदगी से परेशानी बढ़ गई है, वहीं अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि पर्यावरण नियमों का पालन नहीं होने पर संबंधित विभाग पर कार्रवाई भी की जा सकती है।
तोड़फोड़ के मलबे पर गुरुग्राम में दो विभाग आमने-सामने, लोगों को खुद उठाना पड़ रहा कचरा




