गाजियाबाद। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत दाखिले के लिए आवेदन करने वाले लेकिन लॉटरी में चयन से बाहर रह गए बच्चों को अब निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश दिलाया जाएगा। जिले में बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल सामने आए हैं जहां आरक्षित सीटों के बावजूद अभिभावकों ने आवेदन नहीं किया, इसलिए बेसिक शिक्षा विभाग ने फैसला लिया है कि लॉटरी में बाहर हुए पात्र बच्चों को इन्हीं स्कूलों में दाखिला दिया जाएगा। इस वर्ष पहले चरण में दो हजार एक सौ बयालीस और दूसरे चरण में पांच सौ दस बच्चे लॉटरी में चयन से बाहर हो गए थे, जिन्हें सीट आवंटित नहीं हो सकी थी। वहीं जिले में करीब पांच सौ सतहत्तर ऐसे विद्यालय भी मिले हैं जहां आरटीई के तहत किसी अभिभावक ने आवेदन ही नहीं किया। अब विभाग इन स्कूलों में खाली सीटों पर लॉटरी में बाहर हुए बच्चों को प्रवेश दिलाने की तैयारी कर रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग ऐसे बच्चों की सूची तैयार कर उनके अभिभावकों से संपर्क करेगा और प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराएगा। अधिकारियों के अनुसार कई बार अभिभावक आवेदन करते समय केवल बड़े और नामी स्कूलों को ही विकल्प में चुनते हैं, जबकि वहां सीटें सीमित होती हैं। उदाहरण के तौर पर किसी स्कूल में दस सीटें हों और बीस आवेदन आ जाएं तो दस बच्चों को लॉटरी में बाहर होना पड़ता है। इसी कारण कई पात्र बच्चे दाखिले से वंचित रह जाते हैं जबकि कई अन्य स्कूलों में आरक्षित सीटें खाली रह जाती हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी यादव ने बताया कि जिले में कुल दो हजार छह सौ बावन बच्चे दोनों चरणों की लॉटरी में बाहर हो गए हैं और अब प्रयास किया जा रहा है कि कोई भी पात्र बच्चा आरटीई के तहत मिलने वाले मुफ्त शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे।
आरटीई के तहत लॉटरी से बाहर हुए बच्चों को भी मिलेगा मुफ्त दाखिला




