नोएडा। साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में 1 दिसंबर 2022 से 31 मई 2026 तक साइबर ठगी के मामलों में 141.74 करोड़ रुपए की ठगी गई राशि फ्रीज कराई गई, जबकि 75.10 करोड़ रुपए पीड़ितों को वापस दिलाए गए। इस दौरान पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और गुजरात सहित कई राज्यों में सक्रिय साइबर अपराध नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए बड़ी संख्या में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में सब्सिडी, विदेश भेजने, क्रूज और नेवी में नौकरी दिलाने, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, मोबाइल हैकिंग तथा ई-कॉमर्स के जरिए सोने-चांदी के सिक्कों की फर्जी खरीद-फरोख्त करने वाले कई अवैध कॉल सेंटरों का भी भंडाफोड़ किया।
जुलाई 2024 में हुए 16 करोड़ रुपए के चर्चित नैनीताल बैंक सर्वर हैकिंग मामले में एक नाइजीरियाई नागरिक समेत 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। साइबर क्राइम थाना ने डिजिटल ट्रेल और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर मामले का खुलासा कर रकम की बरामदगी भी सुनिश्चित की।
दिसंबर 2024 में यूके स्थित वेंडर के नाम से भेजे गए फर्जी ई-मेल के जरिए 1.55 करोड़ रुपए की ठगी और फरवरी 2025 में जर्मनी स्थित वेंडर के नाम पर 5.07 करोड़ रुपए की साइबर धोखाधड़ी के मामलों में भी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर पूरी रकम संबंधित कंपनियों को वापस दिलाई।
इसके अलावा साइबर कमांडो सचिन धामा के नेतृत्व में गठित टीम ने आई4सी और एनपीसीआई के सहयोग से एक बड़े ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश किया। सोशल मीडिया के माध्यम से फर्जी शेयर बाजार और निवेश योजनाओं के जरिए लोगों को ठगने की साजिश का खुलासा होने पर तमिलनाडु, गुजरात, तेलंगाना, ओडिशा और राजस्थान के संभावित पीड़ितों को समय रहते सतर्क कर करोड़ों रुपए की संभावित ठगी रोकी गई।




