ग्वालियर। 69 वर्षीय सेवानिवृत्त लैब टेक्नीशियन से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.58 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस को पहली बड़ी सफलता मिली है। महाराष्ट्र के नासिक से गिरफ्तार लोहा कारोबारी बिट्ठल फलसे को ग्वालियर लाया गया है। जांच में सामने आया कि पीड़िता से ठगी गई रकम में से 19.50 लाख रुपये उसके आईसीआईसीआई बैंक के करंट अकाउंट में पहुंचे थे। आरोपी खुद को निर्दोष बता रहा था, लेकिन पुलिस की जांच में इसी खाते से पिछले छह महीनों में करीब 1.10 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का भी खुलासा हुआ है, जिससे उसके अन्य साइबर ठगी मामलों में शामिल होने की आशंका गहरा गई है। जांच में यह भी पता चला कि पीड़िता से ठगी गई राशि पहले चार राज्यों के चार खातों में भेजी गई और फिर उसी दिन देश के 11 राज्यों के 30 से अधिक शहरों में मौजूद 133 खातों में ट्रांसफर कर दी गई। पुलिस के अनुसार ये सभी ‘म्यूल अकाउंट’ हैं, जिन्हें कमीशन के आधार पर इस्तेमाल किया जाता है। मामले में सामने आया कि साइबर ठगों का नेटवर्क महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, गुजरात और राजस्थान सहित कई राज्यों तक फैला हुआ है। पीड़िता को मई 2026 में खुद को टेलीकॉम विभाग, दिल्ली पुलिस और सीबीआई का अधिकारी बताने वाले ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोप में 33 दिन तक डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 1.58 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए थे। अब क्राइम ब्रांच आरोपी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और संदिग्ध लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
डिजिटल अरेस्ट ठगी में बड़ा खुलासा, 1.58 करोड़ केस का पहला आरोपी गिरफ्तार




