नई दिल्ली। NEET पेपर लीक मामले में सीकर कोचिंग हब से जुड़ा बड़ा खुलासा सामने आया है, जहां कुछ छात्र कथित तौर पर परीक्षा से पहले पेपर बेचने के लिए गिरोह की तरह काम कर रहे थे। जांच एजेंसियों के अनुसार छात्र सोशल मीडिया ग्रुप बनाकर पेपर खरीदने और बेचने के लिए संपर्क में थे। मामले में जयपुर के जमवारामगढ़ निवासी एक छात्र का नाम सामने आया है, जिसने पहले ही अपने साथियों को पेपर आने की जानकारी दी थी। इसके बाद कथित तौर पर 10 लाख रुपए तक में पेपर बेचने की कोशिश की गई। बताया जा रहा है कि पेपर वायरल तब हुआ जब उसे पाने वाले कुछ छात्रों ने दूसरे ग्रुप में भी शेयर कर दिया। जांच में काउंसलर राकेश कुमार का नाम भी सामने आया है, जिस पर छात्रों के जरिए पेपर बेचने का आरोप है। राजस्थान एसओजी और सीबीआई अब पेपर वायरल करने वाली चेन के साथ मनी ट्रेल की भी जांच कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक वायरल ‘गेस पेपर’ में असली परीक्षा के 125 सवाल हूबहू मिले हैं। मामले के बाद NEET परीक्षा रद्द होने से देशभर के 22-23 लाख छात्र और उनके परिवार तनाव में हैं। छात्रों का कहना है कि कुछ लोगों की गलती की सजा सभी अभ्यर्थियों को मिल रही है। वहीं अब NTA परीक्षा प्रणाली में बदलाव करते हुए CBT और हाइब्रिड मॉडल पर विचार कर रही है, ताकि भविष्य में पेपर लीक की घटनाओं को रोका जा सके। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में परीक्षा कोर्ट की निगरानी में कराने और NTA के पुनर्गठन की मांग भी की गई है।
NEET पेपर लीक में सीकर कोचिंग हब का काला नेटवर्क उजागर, छात्रों तक पहुंची जांच




