IAS अस्मिता लाल: कांवड़ यात्रा में हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा से लेकर नेत्रदान के संकल्प तक, बागपत DM की संवेदनशील कार्यशैली चर्चा में

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बागपत की 31वीं जिलाधिकारी और 2015 बैच की आईएएस अधिकारी अस्मिता लाल इन दिनों अपनी अनूठी प्रशासनिक शैली और मानवीय पहलों को लेकर चर्चा में हैं। सावन 2026 में कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा करने से लेकर मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लेने तक, उनके कई फैसले लोगों के बीच खासा प्रभाव छोड़ रहे हैं।

बागपत, 11 अगस्त।उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की जिलाधिकारी अस्मिता लाल प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ जनता से सीधे जुड़ने और संवेदनशील पहल करने के लिए भी पहचान बना रही हैं। सावन के दौरान कांवड़ यात्रा के मद्देनजर उन्होंने हेलीकॉप्टर से यात्रा मार्ग का सर्वेक्षण किया और विभिन्न राज्यों से बागपत पहुंचे शिवभक्तों का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।

डीएम अस्मिता लाल ने सोशल मीडिया पर इस दौरान की तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि कांवड़ यात्रा मार्ग का हेलीकॉप्टर से सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान जिले के प्रमुख धार्मिक स्थल श्री परशुरामेश्वर पुरा महादेव मंदिर, कांवड़ शिविरों और प्रवेश बिंदुओं का निरीक्षण किया गया। साथ ही विभिन्न राज्यों से आए शिवभक्त श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत और अभिनंदन किया गया।

मरणोपरांत नेत्रदान का लिया संकल्प

अस्मिता लाल की चर्चा केवल कांवड़ यात्रा के दौरान की गई पहल तक सीमित नहीं है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने मरणोपरांत अपनी आंखें दान करने का संकल्प भी लिया है। उनके इस फैसले को अंगदान और नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

नेत्रदान के अपने संकल्प के बारे में उन्होंने कहा कि अपनी आंखों से किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाने से बड़ा कोई दान नहीं हो सकता। उनका मानना है कि अंगदान को लेकर समाज में मौजूद भ्रांतियों को दूर करने और लोगों को इसके लिए प्रेरित करने की जरूरत है।

जनता से जुड़ाव पर भी जोर

डीएम अस्मिता लाल की कार्यशैली में प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ आम लोगों से सीधे संवाद को भी प्राथमिकता दिखाई देती है। जनसुनवाई के दौरान किसानों को स्वयं खतौनी वितरित करने जैसी पहल के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि प्रशासन जनता की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है।

कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों का स्वागत हो या नेत्रदान का संकल्प, अस्मिता लाल की ये पहल प्रशासन में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण की एक अलग तस्वीर पेश करती हैं। यही वजह है कि बागपत में उनकी कार्यशैली को लेकर लोगों के बीच चर्चा बढ़ रही है।

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