गुरुग्राम। मेदांता अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पहली प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया। बिस्तर से विक्ट्री साइन दिखाते हुए उन्होंने कहा कि यह आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और शासन प्रणाली में व्यापक सुधार की शुरुआत है।
वांगचुक ने कहा कि किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे से राष्ट्र नहीं बदलता। उनके अनुसार, जवाबदेही तय होना पहला कदम है, जबकि असली चुनौती व्यवस्था में बुनियादी सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि केवल चेहरे बदलने से नहीं, बल्कि नियमों और नीयत में बदलाव से व्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही शिक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही, नीतियों में पारदर्शिता और जनता की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने अपने आगे के एजेंडे में तीन प्रमुख बातें रखीं। वांगचुक ने कहा कि देश में भय का माहौल खत्म होना चाहिए ताकि छात्र, युवा और आम नागरिक बिना डर अपनी बात रख सकें। उन्होंने संवाद, प्रेम और सहिष्णुता को शासन का आधार बनाने की बात कही और कहा कि देश को सत्य एवं न्याय के मार्ग पर आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने भ्रष्टाचार के हर स्वरूप को खत्म करने के लिए कड़े नियम, पारदर्शिता और तकनीक के इस्तेमाल पर बल दिया।
वांगचुक ने लद्दाख और जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने लद्दाख के पर्यावरण और पहाड़ों की सुरक्षा, स्थानीय लोगों की लोकतांत्रिक भागीदारी तथा जम्मू-कश्मीर से किए गए वादों को पूरा करने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों का विश्वास मजबूत करने और लोकतांत्रिक प्रतिबद्धताओं को निभाने से ही शांति, सुरक्षा और भाईचारे को बढ़ावा मिलेगा।




