गुफरान खान
विशेष संवादाता
वर्ष 1980 में उत्तरप्रदेश प्रयागराज की कचहरी परिसर में दिनदहाड़े हुई हत्या की घटना की जड़ में गांव की रंजिश बताई जाती है। दोनों पक्षों में खेत के विवाद में तनातनी चल रही थी। इसी प्रकरण में जमानत कराने कचहरी आए प्रकाश नारायण पांडेय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
अदालत में पेश साक्ष्यों के अनुसार, नवाबगंज के हथिगहां गांव निवासी श्याम नारायण पांडेय ने अपने बयान में बताया कि उनके परिवार की संतराम और बलराम से खेत को लेकर रंजिश चल रही थी। इसी विवाद में संतराम की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई थी। उनके छोटे भाई प्रकाश नारायण पांडेय 11 फरवरी 1980 को जमानत कराने प्रयागराज कचहरी पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई।
एक की हत्या, अधिवक्ता समेत पांच लोग हुए थे घायल
चर्चित हत्याकांड में प्रकाश नारायण पांडेय की हत्या हुई। इस दौरान हमलावरों ने कई राउंड फायरिंग की थी। इसमें एक अधिवक्ता समेत पांच लोग घायल हुए थे। मृतक के भाई श्याम नारायण की तहरीर पर कर्नलगंज पुलिस ने हत्या और हत्या के प्रयास में एफआईआर दर्ज की थी। कोर्ट ने हत्या के प्रयास में भी दोषी करार देते हुए 10-10 साल की कठोर कारावास और 50-50 हजार का जुर्माना चारों दोषियों पर लगाया।
पूर्व विधायक को आगरा, बाकी तीन को नैनी जेल भेजा
अदालत ने सजा सुनाए जाने के बाद पूर्व विधायक विजय मिश्रा को वापस आगरा जेल भेज दिया। बाकी तीन दोषियों को केंद्रीय कारागार नैनी भेज दिया गया






