नई दिल्ली। देशभर में हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली टेल्मिसार्टन समेत कई दवाओं के ब्रांड और बैच सरकारी जांच में फेल पाए गए हैं, जिससे एक गंभीर स्वास्थ्य खतरे की आशंका बढ़ गई है; सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) की रिपोर्ट के मुताबिक अलग-अलग कंपनियों द्वारा बनाई गई इन दवाओं में “घुलने में विफलता” जैसी बड़ी खामियां पाई गईं, जिसके कारण दवा शरीर में ठीक से घुल नहीं पाती और उसका असर कम या पूरी तरह खत्म हो सकता है, वहीं कुछ मामलों में एक्टिव इंग्रीडिएंट की कमी यानी “एसे फेलियर” भी सामने आया है; जांच में करीब दस कंपनियों के प्रोडक्ट स्टैंडर्ड क्वालिटी के नहीं (NSQ) पाए गए, जिससे यह साफ है कि समस्या किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है बल्कि व्यापक स्तर पर मौजूद है, साथ ही एनालाप्रिल, एटेनोलोल, मेटोप्रोलोल और लैबेटालोल जैसी अन्य बीपी दवाओं के कुछ बैच भी मानकों पर खरे नहीं उतरे; विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति खतरनाक इसलिए है क्योंकि मरीजों को दवा के बेअसर होने का कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिलता और उनका ब्लड प्रेशर बिना लक्षण के अनियंत्रित रह सकता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है; CDSCO ने ऐसे बैचों को बाजार से वापस मंगाने के निर्देश दिए हैं और संबंधित कंपनियों से जवाब तलब किया है, वहीं मरीजों को सलाह दी गई है कि वे केवल भरोसेमंद दवा विक्रेताओं से दवाएं खरीदें, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट जांचें और नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर मॉनिटर करते रहें।
ब्लड प्रेशर की दवाओं पर अलर्ट: टेल्मिसार्टन समेत कई दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल




