नई दिल्ली। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों और भारत में उग्रवादी गतिविधियों को समर्थन देने के आरोप में 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान मैथ्यू एरॉन वैन डाइक (अमेरिका) समेत छह यूक्रेनी नागरिकों के रूप में हुई है। एनआईए ने 13 मार्च को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता से इनकी गिरफ्तारी की थी। एजेंसी के मुताबिक आरोपी हथियारों और आतंकवादी साजो-सामान की सप्लाई करने के साथ प्रशिक्षण देकर उग्रवादी संगठनों की मदद कर रहे थे और AK-47 रखने वाले आतंकियों के संपर्क में थे। विशेष एनआईए कोर्ट के जज प्रशांत शर्मा ने सभी आरोपियों को 11 दिन की रिमांड पर भेज दिया है, जबकि एजेंसी ने 15 दिन की हिरासत मांगी थी। इस बीच यूक्रेन ने भारत के सामने विरोध दर्ज कराते हुए अपने नागरिकों की रिहाई की मांग की है और कहा है कि उन्हें हिरासत की आधिकारिक सूचना नहीं दी गई। वहीं एनआईए का कहना है कि आरोपियों के तार प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े हैं और मामले की जांच जारी है। खुफिया सूत्र बताते हैं कि ये लोग म्यांमार के आतंकी ग्रुप को ड्रोन वॉरफेयर सिखाने आए थे। अगर म्यांमार के आतंकी समूह आधुनिक ड्रोन से लैस हो गए, तो इसका सीधा असर भारत के मिजोरम, मणिपुर और नगालैंड की सुरक्षा पर पड़ेगा। इस पूरे मामले पर यूक्रेन ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत में यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सैंडर पोलिशचक ने विदेश मंत्रालय को औपचारिक विरोध पत्र सौंपा है। यूक्रेन का कहना है कि उसके नागरिकों के खिलाफ अब तक किसी भी आपराधिक गतिविधि के ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने यह भी आरोप लगाया है कि हिरासत में लिए गए नागरिकों की जानकारी उन्हें समय पर नहीं दी गई, जो कि वियना संधि के प्रावधानों का उल्लंघन है। इस संधि के तहत किसी भी विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी या हिरासत की स्थिति में उसके देश के दूतावास को तुरंत सूचित करना जरूरी होता है। यूक्रेन का कहना है कि भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में कई जगह ऐसे हैं जहां विशेष अनुमति की जरूरत होती है, लेकिन जमीन पर इन सीमाओं को स्पष्ट रूप से चिह्नित नहीं किया गया है। ऐसे में विदेशी पर्यटकों या नागरिकों द्वारा अनजाने में नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
एनआईए ने 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक को पकड़ा, कोर्ट ने 11 दिन की रिमांड पर भेजा




