रिश्वतखोरी मामले में गुरुग्राम के पूर्व डीएफएससी अनिल कुमार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से मिली जमानत

Must read

गुरुग्राम। खाद्य आपूर्ति विभाग में कथित रिश्वतखोरी और डिपो होल्डरों से कमीशन वसूली के चर्चित मामले में पूर्व जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) अनिल कुमार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है।इससे पहले अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डा. गगन गीत कौर की अदालत उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी थी। अदालत में अनिल कुमार की पैरवी अधिवक्ता सतपाल यादव कर रहे हैं। फरवरी में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अनिल कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उस समय शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता राहुल टुटेजा ने अदालत में दलील दी थी कि मामले में पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं और आरोप बेहद गंभीर हैं। इस बीच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने मामले की जांच पूरी कर पूर्व डीएफएससी अनिल कुमार, सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी (एएफएसओ) विजय टांक और विभाग के अधिकारी प्रेम पूर्ण सिंह के विरुद्ध अदालत में चार्जशीट भी दाखिल कर दी है।चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत ने आरोपितों को चालान की प्रति उपलब्ध कराई थी और मामले में आरोप तय करने के लिए सुनवाई की तारीख तय की थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में अनिल कुमार की ओर से अधिवक्ता सतपाल यादव पेश हुए थे। अदालत में यह भी बताया गया था कि एसीबी की जांच पूरी हो चुकी है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। मदनपुरी निवासी राशन डिपो होल्डर रूपेश अरोड़ा ने एंटी करप्शन ब्यूरो को शिकायत दी थी कि खाद्य आपूर्ति विभाग के कुछ अधिकारी डिपो होल्डरों से कमीशन की अवैध वसूली करते हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एएफएसओ विजय टांक, निरीक्षक प्रेम पूर्ण सिंह और डीएफएससी अनिल कुमार मिलकर राशन डिपो संचालकों से करीब 10 प्रतिशत तक कमीशन की मांग करते थे। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि मार्च 2024 में अनिल कुमार ने दबाव बनाकर शिकायतकर्ता से एक आईफोन 15 प्रो और एप्पल वाच रिश्वत के रूप में ली। वहीं एएफएसओ विजय टांक पर 35 हजार रुपये अपने बैंक खाते में लेने और निरीक्षक प्रेम पूर्ण सिंह पर 56 हजार रुपये का एसी लेने का आरोप लगाया गया था। प्रारंभिक जांच के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने 11 जुलाई 2024 को तीनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 7, 7ए और 13 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान नवंबर 2025 में अनिल कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। बाद में उन्होंने अदालत में जमानत याचिका दायर की। जिसे ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया था। अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से उन्हें जमानत मिलने के बाद मामले में आगे की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी।

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article