मंडला जिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को नोटिस

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मंडला। जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिति को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और मंडला सीएमएचओ को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका में आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में डॉक्टरों की भारी कमी, विशेषज्ञ चिकित्सकों के खाली पद और प्रसूति वार्ड की दयनीय हालत को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। कोर्ट को बताया गया कि करीब 10 लाख आबादी वाले जिले में अधिकांश लोग जिला अस्पताल पर निर्भर हैं, लेकिन वहां 42 स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 17 डॉक्टर कार्यरत हैं। अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिसके कारण गंभीर मरीजों को जबलपुर और नागपुर रेफर करना पड़ता है। रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से सोनोग्राफी सेवाएं भी प्रभावित हैं। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि प्रसूति वार्ड में बिस्तरों की कमी के चलते गर्भवती महिलाओं और नवजातों को फर्श पर लेटना पड़ रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। याचिकाकर्ता ने प्रशासन पर लगातार शिकायतों और ज्ञापनों के बावजूद कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। हाईकोर्ट में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार, अतिरिक्त बिस्तरों की व्यवस्था और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

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