नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने निजी स्लीपर बस में 17 वर्षीय छात्रा के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले की जांच पूरी करते हुए अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस के मुताबिक, वारदात 4 अगस्त की रात उस समय हुई, जब छात्रा ग्रेटर नोएडा से दिल्ली की तरफ जा रही बस में सवार हुई थी। मामले में बस चालक कुलदीप (39) और कंडक्टर संदीप (26) को आरोपी बनाया गया है।
तीस हजारी कोर्ट में दाखिल करीब 398 पन्नों की चार्जशीट में पुलिस ने 50 गवाहों के बयान और फॉरेंसिक जांच से जुड़े साक्ष्य शामिल किए हैं। दोनों आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 6 समेत BNS की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है।
बस में सवार होने के बाद बदला घटनाक्रम
जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, मैनपुरी की रहने वाली 11वीं कक्षा की छात्रा 4 अगस्त की रात नोएडा में अपने रिश्तेदार से मिलने के लिए निकली थी। रास्ते में वह बस का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात बस के चालक और कंडक्टर से हुई।
पुलिस का कहना है कि दोनों ने छात्रा से बातचीत की और उसे भरोसा दिलाया कि बस नोएडा की ओर जा रही है। इसके बाद छात्रा बस में बैठ गई। पुलिस की जांच के अनुसार, बस आगे बढ़ने के बाद घटनाक्रम सामान्य रूट से अलग हो गया।
रूट बदलने के बाद सामने आया अपराध
चार्जशीट में पुलिस ने आरोप लगाया है कि बस को निर्धारित मार्ग से हटाकर बख्तावरपुर गांव की तरफ ले जाया गया। करीब 47 किलोमीटर की यात्रा के दौरान बस के भीतर नाबालिग के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
पुलिस के मुताबिक, कंडक्टर संदीप पर छात्रा के साथ अश्लील हरकत करने और विरोध करने पर उसे धमकाने का आरोप है। इसके बाद दोनों आरोपियों पर छात्रा के साथ गैंगरेप करने का आरोप लगाया गया है।
वारदात के बाद बस दिल्ली के रिंग रोड क्षेत्र में पहुंची, जहां छात्रा को नीचे उतार दिया गया। पुलिस के अनुसार, इसके बाद आरोपी बस को तिमारपुर की पार्किंग में खड़ा कर वहां से चले गए।
पीड़िता सीधे पुलिस के पास पहुंची
बस से उतरने के बाद छात्रा ने पुलिस से संपर्क किया और कश्मीरी गेट थाने पहुंचकर पूरी घटना बताई। उसने पुलिस को आरोपियों के बारे में जानकारी दी और उनकी पहचान भी की।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने बस की तलाश शुरू कर दी। जांच टीम ने रास्ते में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। इन्हीं फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर पुलिस उस बस तक पहुंची, जिसमें घटना होने का आरोप है।
इसके बाद चालक और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया।
फॉरेंसिक जांच ने बढ़ाया केस का आधार
जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बस और पीड़िता से मिले फॉरेंसिक साक्ष्य रहे। पुलिस ने घटना के बाद बस, सीटों और पीड़िता के कपड़ों से नमूने एकत्र किए थे।
चार्जशीट के मुताबिक, इन नमूनों में मिले जैविक साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई गई। पुलिस का दावा है कि जांच में मिले DNA प्रोफाइल का आरोपियों के DNA नमूनों से मिलान हुआ। पीड़िता के शरीर से लिए गए नमूनों में भी आरोपी के DNA से मेल मिलने की बात चार्जशीट में दर्ज की गई है।
पुलिस ने इन वैज्ञानिक साक्ष्यों को केस की जांच में महत्वपूर्ण आधार बनाया है।
बस की सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के घेरे में
वारदात के बाद पुलिस ने केवल आरोपियों की भूमिका ही नहीं, बल्कि बस की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन से जुड़े पहलुओं की भी जांच की।
जांच में पता चला कि बस के खिलाफ 11 ट्रैफिक चालान लंबित थे। बस में लगाया गया CCTV कैमरा भी काम नहीं कर रहा था। इसके अलावा खिड़कियों पर ऐसे भारी पर्दे लगे थे, जिनकी वजह से बाहर से बस के भीतर की गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल था।
पुलिस ने इन परिस्थितियों को भी केस की जांच में शामिल किया है।
कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
जांच के दौरान बस कंपनी में ड्राइवर और कंडक्टर की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी जानकारी जुटाई गई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों आरोपियों को काम पर रखने से पहले पर्याप्त सत्यापन नहीं कराया गया था।
पुलिस ने इस पहलू से जुड़े दस्तावेज और अन्य जानकारियां भी जांच का हिस्सा बनाई हैं।
अब अदालत में दाखिल चार्जशीट के आधार पर मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध मौखिक, परिस्थितिजन्य और फॉरेंसिक साक्ष्यों को चार्जशीट में शामिल किया है।




