नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की छात्राओं से कथित यौन उत्पीड़न के मामले में कांग्रेस सांसद और प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को दिल्ली की अदालत से फिलहाल अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। साथ ही पांच नवंबर तक उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। मामले में कम से कम 11 छात्राओं की ओर से यौन उत्पीड़न की शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अकोइजम मणिपुर की इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद हैं। यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद जेएनयू प्रशासन ने अक्टूबर में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। हालांकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय के इस फैसले पर रोक लगा दी है।
अग्रिम जमानत याचिका पर पुलिस को नोटिस, केस फाइल के साथ पेश होने का निर्देश
दिल्ली की अदालत में मंगलवार को अकोइजम की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर मामले में जवाब दाखिल करने को कहा।
अदालत ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई के दौरान मामले की केस फाइल लेकर उपस्थित हों। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पांच नवंबर तक सांसद के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अग्रिम जमानत याचिका पर आगे की सुनवाई भी पांच नवंबर को निर्धारित की गई है। हालांकि यह अंतरिम राहत है और इसे आरोपों से बरी किए जाने या अग्रिम जमानत मंजूर होने के रूप में नहीं देखा जा सकता।
छात्राओं को आवास पर बुलाने और अनुचित व्यवहार के आरोप
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मई में जेएनयू की कम से कम 11 छात्राओं ने प्रोफेसर अकोइजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें की थीं।
शिकायतों में आरोप लगाया गया कि प्रोफेसर छात्राओं को बैठक करने के बहाने विश्वविद्यालय परिसर स्थित अपने आवास पर बुलाते थे और उनके साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न का प्रयास करते थे।
कुछ छात्राओं ने कक्षाओं के दौरान अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने के आरोप भी लगाए हैं।
ये सभी आरोप शिकायतों का हिस्सा हैं। इनकी सत्यता और संबंधित व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
12 अक्टूबर को दर्ज हुई FIR, विश्वविद्यालय ने की थी बर्खास्तगी
छात्राओं की शिकायतों के बाद जेएनयू प्रशासन ने अक्टूबर में अकोइजम को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया था।
इसके कुछ दिन बाद 12 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। पुलिस के मुताबिक, जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से उपलब्ध कराई गई शिकायत और दस्तावेजों के आधार पर वसंत कुंज उत्तर थाने में मामला दर्ज किया गया।
इसके बाद सांसद ने अपनी बर्खास्तगी को चुनौती देते हुए विश्वविद्यालय की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
बर्खास्तगी को बताया दुर्भावनापूर्ण, हाईकोर्ट से मिली राहत
अकोइजम ने विश्वविद्यालय के फैसले को दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी सेवाएं समाप्त करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
इस विवाद को लेकर उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सोमवार को उच्च न्यायालय ने जेएनयू की ओर से जारी बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगा दी।
उच्च न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में निर्धारित की है।
पांच नवंबर की सुनवाई पर टिकी नजर
अब इस मामले में दो अलग-अलग न्यायिक प्रक्रियाएं चल रही हैं। एक ओर दिल्ली उच्च न्यायालय में विश्वविद्यालय की बर्खास्तगी संबंधी कार्रवाई का विवाद विचाराधीन है, जबकि दूसरी ओर यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हो रही है।
पांच नवंबर को दिल्ली पुलिस का जवाब और जांच अधिकारी की ओर से प्रस्तुत केस फाइल महत्वपूर्ण होगी। इसी सुनवाई में अदालत अकोइजम की अग्रिम जमानत याचिका पर आगे विचार करेगी।
फिलहाल आरोपों की जांच और न्यायिक कार्यवाही जारी है। अदालत की ओर से दी गई अंतरिम राहत का अर्थ आरोपों की पुष्टि या खंडन नहीं है।




