गाजियाबाद: साहिबाबाद इलाके में ई-रिक्शा चालक के साथ कथित तौर पर मारपीट, बेहोश करने और लूटपाट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि तीन युवकों ने सवारी बनकर उसके ई-रिक्शा में बैठने के बाद वारदात को अंजाम दिया। आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी और उसके पास से नकदी लूटकर फरार हो गए।
मामले में एक और गंभीर आरोप यह है कि पीड़ित घटना के बाद कार्रवाई की मांग लेकर कई बार पुलिस के पास पहुंचा, लेकिन उसकी शिकायत पर तत्काल केस दर्ज नहीं किया गया। आखिरकार उसे अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। न्यायालय के आदेश के बाद करीब सात महीने बाद साहिबाबाद थाने में तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
मोहन नगर से सवारी लेकर निकला था चालक
पीड़ित विमल शर्मा के अनुसार, घटना 10 जनवरी की शाम करीब छह बजे की है। वह मोहन नगर से नया बस अड्डा जाने के लिए सवारियां लेकर निकले थे। करहेड़ा कट के पास उन्हें तीन युवक मिले, जिन्होंने ई-रिक्शा में बैठने की बात कही।
आरोप है कि एक युवक चालक के पास वाली सीट पर बैठ गया, जबकि दो अन्य पीछे बैठ गए। कुछ दूरी तय करने के बाद अचानक तीनों ने चालक को दबोच लिया।
रूमाल से नाक दबाने का आरोप, फिर हो गया बेहोश
विमल शर्मा का आरोप है कि आरोपियों ने उनकी नाक पर रूमाल रख दिया और उन्हें जकड़ लिया। इस दौरान बदमाशों ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। कुछ ही देर बाद वह बेहोश हो गए।
पीड़ित के मुताबिक, वारदात में केवल ई-रिक्शा में बैठे युवक ही नहीं, बल्कि बाइक पर मौजूद दो अन्य लोग और एक कार में सवार तीन लोगों की भूमिका भी संदिग्ध रही। होश आने के बाद उन्हें अपने साथ हुई लूटपाट की जानकारी हुई और आरोप है कि बदमाश करीब 2200 रुपये लेकर फरार हो चुके थे।
112 पर कॉल कर मांगी मदद
होश में आने के बाद विमल शर्मा ने तुरंत पुलिस की आपातकालीन सेवा 112 पर सूचना दी। उन्होंने अपने परिचितों को भी मौके पर बुलाकर मदद मांगी।
पीड़ित का आरोप है कि जब वह शिकायत लेकर पुलिस चौकी पहुंचे तो उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका कहना है कि पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई करने के बजाय उनसे सवाल किया कि उन्होंने ऐसी सवारियां ई-रिक्शा में क्यों बैठाईं और आत्मरक्षा में हमला क्यों नहीं किया।
बार-बार शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
पीड़ित के अनुसार, उन्होंने कई बार पुलिस को शिकायत दी और कार्रवाई की मांग की। आरोप है कि इस दौरान उनसे तहरीर में बदलाव भी कराया गया, लेकिन इसके बावजूद मामला दर्ज नहीं किया गया।
जब स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को डाक के माध्यम से शिकायत भेजी। इसके बाद भी कार्रवाई न होने पर विमल शर्मा ने न्यायालय की शरण ली।
अदालत के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा
आखिरकार गाजियाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय के आदेश के बाद 6 सितंबर को साहिबाबाद थाने में तीन युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
साहिबाबाद के एसीपी अमित सक्सेना ने बताया कि अदालत के आदेश के अनुपालन में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।




