गाजियाबाद। लोनी के विपिन प्रजापति हत्याकांड में फरार चल रहे 20 हजार रुपये के इनामी मुख्य आरोपी सोनू को उसकी असली पहचान छिपाकर दूसरे नाम से जेल भेजे जाने के मामले में तीन पुलिसकर्मी विभागीय जांच में दोषी पाए गए हैं। पहले से निलंबित तीनों दारोगाओं के खिलाफ अब मिसकंडक्ट की कार्रवाई की गई है।
मामले की जांच एसपी सिटी अभिषेक कुमार सिंह ने की थी। जांच पूरी होने के बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट एसएसपी अंकिता शर्मा को सौंपी। रिपोर्ट में तीनों दारोगाओं की भूमिका दोषपूर्ण पाए जाने के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई।
इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर इसलिए गंभीर सवाल खड़े किए थे क्योंकि हत्या के मामले में वांछित और इनामी आरोपी को कथित तौर पर उसकी वास्तविक पहचान के बजाय ‘सोहनपाल उर्फ सूरज’ के नाम से तमंचा बरामदगी के मामले में जेल भेज दिया गया था।
हत्या में था वांछित, दूसरे नाम से तमंचे में भेज दिया जेल
लोनी में हुए विपिन प्रजापति हत्याकांड में सोनू को मुख्य आरोपी बनाया गया था। वह गिरफ्तारी से बच रहा था और पुलिस ने उस पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
इसी बीच 23 जुलाई को बिनावर थाना पुलिस ने एक युवक को तमंचे के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस रिकॉर्ड में उसकी पहचान सोहनपाल उर्फ सूरज के रूप में दर्ज की गई और इसी नाम से उसे जेल भेज दिया गया।
बाद में सामने आया कि जेल भेजा गया युवक कथित तौर पर वही सोनू था, जिसकी लोनी के हत्याकांड में पुलिस को तलाश थी। उसकी वास्तविक पहचान उजागर होने के बाद मामला अधिकारियों तक पहुंचा और विभागीय जांच शुरू कर दी गई।
तीन थानों के दारोगाओं की भूमिका पर उठे सवाल
जांच में बिनावर थाने के दारोगा बलवीर सिंह, मूसाझाग थाने के दारोगा राजकुमार सिंह और फैजगंज बेहटा थाने में तैनात रहे एसएसआई नरेंद्र कुमार की भूमिका की पड़ताल की गई।
आरोप था कि फैजगंज बेहटा में तैनात पुलिसकर्मी ने मामले में संपर्क स्थापित किया, मूसाझाग में तैनात दारोगा के जरिए बातचीत कराई और फिर बिनावर पुलिस के माध्यम से आरोपी को दूसरी पहचान के आधार पर जेल भेजा गया।
मामला सामने आने के बाद तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद विभागीय जांच एसपी सिटी अभिषेक कुमार सिंह को सौंपी गई।
दूसरे जिलों तक पहुंची जांच, गोपनीय तरीके से जुटाई गई जानकारी
जांच केवल बदायूं तक सीमित नहीं रही। आरोपी और पुलिसकर्मियों के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल के लिए दूसरे जिलों से भी गोपनीय स्तर पर जानकारी जुटाई गई।
विशेष रूप से इस दावे की जांच की गई कि फैजगंज बेहटा में तैनात रहे पुलिसकर्मी का आरोपी सोनू से रिश्तेदारी का संबंध था। इसकी पुष्टि के लिए गाजियाबाद पुलिस की भी मदद ली गई।
जांच में दोनों के बीच रिश्तेदारी होने की बात की पुष्टि होने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद पूरे घटनाक्रम में संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर जांच और महत्वपूर्ण हो गई।
जांच में तीनों की भूमिका दोषपूर्ण, अब मिसकंडक्ट की कार्रवाई
एसपी सिटी अभिषेक कुमार सिंह ने उपलब्ध रिकॉर्ड, संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका और गोपनीय जांच से सामने आए तथ्यों को शामिल करते हुए रिपोर्ट तैयार की। विभागीय जांच में तीनों दारोगाओं की भूमिका दोषपूर्ण पाई गई।
रिपोर्ट एसएसपी अंकिता शर्मा को भेजे जाने के बाद तीनों के खिलाफ मिसकंडक्ट की कार्रवाई की गई है।
एसएसपी अंकिता शर्मा ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि एसपी सिटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर तीनों पुलिसकर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की गई है। अब इस प्रकरण में आगे की कार्रवाई विभागीय प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।




