नई दिल्ली/जम्मू-कश्मीर। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान स्थित आतंकी ढांचों को पहुंचे नुकसान के बाद अब प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करने की कोशिशों की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को मिले खुफिया इनपुट के आधार पर नवंबर से दिसंबर के बीच जम्मू-कश्मीर में किसी बड़े आतंकी हमले की संभावित साजिश को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।
खुफिया एजेंसियां पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क की गतिविधियों, सीमा पार लॉन्चिंग पैड और घुसपैठ की संभावित कोशिशों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। हालांकि किसी संभावित हमले के संबंध में आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
कमजोर पड़े नेटवर्क को फिर सक्रिय करने की कोशिश
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद जिन आतंकी संगठनों के ढांचे और ठिकानों को नुकसान पहुंचा था, उन्हें दोबारा संगठित करने की कोशिश की जा रही है। पाकिस्तान की ओर से कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-ताइबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े नेटवर्क को सक्रिय करने के प्रयासों की जानकारी जांच एजेंसियों के संज्ञान में आई है।
बताया जा रहा है कि पुराने और बड़े ठिकानों को उसी स्वरूप में दोबारा खड़ा करने के बजाय छोटे मॉड्यूल और नए सुरक्षित ठिकानों के जरिए गतिविधियों को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा सकती है।
बहावलपुर से लेकर एलओसी तक गतिविधियों पर नजर
खुफिया इनपुट के मुताबिक, बहावलपुर क्षेत्र में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े इलाकों में दोबारा गतिविधियां देखे जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा लश्कर से जुड़े कथित हैंडलरों तक फंडिंग पहुंचने और नियंत्रण रेखा के आसपास छोटे नेटवर्क विकसित किए जाने की आशंका पर भी जांच की जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियां इन गतिविधियों को जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क के संभावित पुनर्गठन के संकेत के तौर पर देख रही हैं। जांच का एक प्रमुख बिंदु यह भी है कि क्या इन गतिविधियों का संबंध आने वाले महीनों में किसी बड़ी वारदात की तैयारी से है।
नवंबर तक नेटवर्क सक्रिय करने की आशंका
खुफिया एजेंसियों के आकलन के अनुसार, पाकिस्तान समर्थित आतंकी ढांचे को एक तय समयसीमा के भीतर सक्रिय करने की कोशिश की जा सकती है। आशंका है कि जम्मू-कश्मीर में किसी बड़ी वारदात के जरिए आतंकियों के मनोबल को बढ़ाने और नए सिरे से अपनी मौजूदगी दिखाने का प्रयास किया जा सकता है।
इसी वजह से सीमा क्षेत्रों, संवेदनशील प्रतिष्ठानों और जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पाकिस्तान-तुर्किये संबंधों पर भी एजेंसियों की नजर
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान और तुर्किये के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। खुफिया स्तर पर यह आकलन किया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा और रणनीतिक सहयोग का क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
विदेशी लड़ाकों को लेकर खुफिया रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
तुर्किये समर्थित कथित सीरियाई लड़ाकों को पाकिस्तान के रास्ते कश्मीर क्षेत्र में भेजे जाने की संभावनाओं से संबंधित खुफिया रिपोर्ट ने पहले भी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क किया था।
कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों और थिंक टैंक नॉर्डिक मॉनिटर की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तुर्किये की निजी सैन्य कंपनी सादात और सीरियाई मिलिशिया से जुड़े लोगों के बीच विदेशी लड़ाकों की संभावित तैनाती को लेकर चर्चा हुई है।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। सुरक्षा एजेंसियां ऐसे इनपुट की तकनीकी और मानवीय खुफिया माध्यमों से जांच कर रही हैं।
हर गतिविधि पर पैनी नजर
सुरक्षा एजेंसियों का फोकस फिलहाल आतंकी फंडिंग, सीमा पार गतिविधियों, लॉन्चिंग पैड, डिजिटल संपर्कों और संभावित घुसपैठ के रास्तों पर है। जम्मू-कश्मीर में किसी भी संभावित आतंकी खतरे को देखते हुए सुरक्षा बलों को सतर्क रखा गया है।
जांच एजेंसियां लगातार इनपुट का विश्लेषण कर रही हैं और आने वाले महीनों में संभावित सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए आतंकवाद विरोधी अभियान और खुफिया निगरानी को और मजबूत किया जा रहा है।




