नई दिल्ली। इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी बड़ी विमान कंपनियों ने सरकार के उस नए नियम का विरोध किया है, जिसमें हर फ्लाइट की कम से कम 60% सीटें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के देने का निर्देश दिया गया है, एयरलाइंस का कहना है कि इससे उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ेगा और नुकसान की भरपाई के लिए उन्हें टिकट के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। इन कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है और कहा है कि सीट चयन शुल्क उनकी कमाई का वैध स्रोत है, क्योंकि वे पहले से ही बहुत कम मुनाफे पर काम करती हैं और ईंधन, रखरखाव व एयरपोर्ट शुल्क जैसे खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। एयरलाइंस का यह भी कहना है कि इस फैसले से उनकी कीमत तय करने की स्वतंत्रता कम होगी और इसका असर अंततः सभी यात्रियों पर पड़ेगा, चाहे वे सीट चुनना चाहें या नहीं। दरअसल, सरकार ने हवाई यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से नया नियम लागू किया है, जिसके तहत अब यात्रियों को ज्यादा सीट विकल्प बिना अतिरिक्त शुल्क के मिलेंगे, जबकि पहले केवल करीब 20% सीटें ही मुफ्त उपलब्ध होती थीं और बाकी के लिए 500 से 3000 रुपये तक वसूले जाते थे। नए नियम के अनुसार एक ही PNR पर यात्रा करने वाले यात्रियों को साथ या पास-पास सीट देने का प्रावधान भी किया गया है, साथ ही एयरलाइंस को अतिरिक्त सेवाओं और यात्रियों के अधिकारों से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध करानी होगी, हालांकि इस फैसले को लेकर एयरलाइंस और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।
नई सीट नियमों पर एयरलाइंस का विरोध, किराया बढ़ने की चेतावनी




