सिरसा। सिरसा के नाथूसरी चोपटा ब्लॉक के अली मोहम्मद गांव की 96 साल की हरदोई देवी ने साक्षरता की दिशा में एक शानदार कदम उठाया है। रविवार को उन्होंने उल्लास नव भारत कार्यक्रम के तहत पढ़ने और लिखने की परीक्षा दी। उनके इस पक्के इरादे ने पूरे ज़िले में दर्जनों बुज़ुर्गों को शिक्षा की ओर अपना पहला कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। फाउंडेशन लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी असेसमेंट टेस्ट सिरसा के 140 केंद्रों पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चला। प्रतिभागी अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय केंद्र पर पहुंचकर तीन घंटे की यह परीक्षा दे सकते थे। लगातार अपडेट हो रहे सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिन के आखिर तक 5,500 से ज़्यादा लोगों ने यह परीक्षा दी, जिनमें से 5,436 लोग पास हुए। ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों, कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. पी.डी. बेनीवाल और ज़िला विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. मुकेश कुमार सहित शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने परीक्षा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न केंद्रों का दौरा किया। डॉ. बेनीवाल ने कहा कि इस कार्यक्रम की सफलता समुदाय की भागीदारी पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि कई पढ़े-लिखे स्थानीय लोग स्वयंसेवक के तौर पर शिक्षकों की भूमिका निभाते हैं और बुज़ुर्गों को पढ़ना-लिखना सीखने में मदद करते हैं, जिससे उन्हें साक्षर बनने का एक सच्चा मौका मिलता है। बुज़ुर्ग प्रतिभागियों का उत्साह यह साबित करता है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।यह कार्यक्रम सिरसा में सभी लोगों तक साक्षरता पहुँचाने के बढ़ते प्रयासों को दर्शाता है, और यह साबित करता है कि सीखना एक जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है। परीक्षा में हरदोई देवी की मौजूदगी दृढ़ता का प्रतीक बन गई, जिसने युवा और बुज़ुर्ग, दोनों तरह के निवासियों को शिक्षा की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। दोपहर तक, परीक्षा केंद्र उत्साह से भरे हुए थे, जहाँ प्रतिभागी अपनी छोटी-छोटी, लेकिन महत्वपूर्ण सफलताओं का जश्न मना रहे थे। हरदोई देवी के लिए यह परीक्षा महज़ एक इम्तिहान नहीं थी, बल्कि यह उनकी अपनी एक निजी जीत थी और पूरे समुदाय के लिए प्रेरणा का एक स्रोत थी।




