गाजियाबाद पुलिस चौकी में धमाके के बाद आतंकी साजिश की आशंका, संदिग्ध संगठन ने ली जिम्मेदारी; ATS-NIA समेत कई एजेंसियां जांच में जुटीं

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गाजियाबाद। इंदिरापुरम थाना क्षेत्र की वसुंधरा पुलिस चौकी में शुक्रवार रात हुए जोरदार धमाके ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। शुरुआत में एयर कंडीशनर के कंप्रेसर या पटाखों से विस्फोट होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन कुछ घंटे बाद सोशल मीडिया पर एक संदिग्ध संगठन की ओर से जिम्मेदारी लेने का दावा सामने आने से मामले ने नया मोड़ ले लिया। इसके बाद उत्तर प्रदेश एटीएस, एसटीएफ, आईबी, एनआईए और दिल्ली पुलिस की विशेष टीमों ने भी जांच में सक्रियता दिखाई।

धमाके में चौकी की खिड़कियों के शीशे टूट गए और दीवार में दरार पड़ गई। इस दौरान खाना पहुंचाने आया एक डिलीवरी कर्मचारी कांच के टुकड़े लगने से घायल हो गया। हालांकि पुलिस ने अब तक धमाके को आतंकी हमला घोषित नहीं किया है। विस्फोट की वास्तविक वजह और संगठन के दावे की सत्यता की जांच जारी है।

रात में तेज धमाका, चौकी की दीवार में आई दरार

घटना शुक्रवार, छह नवंबर की रात करीब नौ बजे की है। वसुंधरा पुलिस चौकी में अचानक तेज धमाका हुआ, जिससे आसपास अफरातफरी मच गई।

विस्फोट इतना तेज था कि चौकी की दो खिड़कियों के शीशे टूट गए और दीवार में दरार आ गई। घटना के समय चौकी में एक उपनिरीक्षक मौजूद थे।

इसी दौरान खाना पहुंचाने आया डिलीवरी कर्मचारी टूटे हुए कांच की चपेट में आ गया। उसके सिर और चेहरे पर चोटें आईं। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई गई। चौकी में मौजूद पुलिसकर्मी सुरक्षित रहे।

रात ढाई बजे सोशल मीडिया पर सामने आया दावा

धमाके के कुछ घंटे बाद शनिवार तड़के करीब ढाई बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘Ghazi 2’ नाम के अकाउंट से एक संदिग्ध संदेश सामने आया।

इस संदेश में ‘तहरीक-उल-मुजाहिदीन हिंदुस्तान’ नाम के संगठन की ओर से वसुंधरा पुलिस चौकी में हुए विस्फोट की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया।

संदेश के साथ कथित वीडियो और अन्य सामग्री भी प्रसारित की गई। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सोशल मीडिया अकाउंट और संदेश की जांच शुरू कर दी।

हालांकि अभी तक यह स्थापित नहीं हो सका है कि संदेश जारी करने वाले लोगों का धमाके से वास्तव में कोई संबंध है या नहीं।

शनिवार को चौकी पहुंचीं कई सुरक्षा एजेंसियां

संदिग्ध संगठन के दावे के बाद शनिवार को उत्तर प्रदेश एटीएस, एसटीएफ, इंटेलिजेंस ब्यूरो, एनआईए और दिल्ली पुलिस से जुड़ी टीमों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।

फॉरेंसिक विशेषज्ञों और बम निरोधक दस्ते ने भी मौके से नमूने एकत्र किए। जांच टीमों ने क्षतिग्रस्त दीवार, खिड़कियों और आसपास के हिस्सों की पड़ताल की।

पुलिस विस्फोट की प्रकृति समझने के लिए घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है।

विस्फोटक इस्तेमाल हुआ या तकनीकी खराबी, अभी स्पष्ट नहीं

शुरुआती जांच में एयर कंडीशनर के कंप्रेसर में खराबी या पटाखों के कारण धमाका होने जैसी संभावनाओं पर विचार किया गया।

वहीं, संदिग्ध संगठन का दावा सामने आने के बाद किसी सुनियोजित हमले की आशंका को भी जांच में शामिल किया गया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में घटनास्थल से बारूद या विस्फोटक पदार्थ के स्पष्ट अवशेष नहीं मिले हैं। नमूनों की विस्तृत फॉरेंसिक जांच के बाद ही विस्फोट की प्रकृति का पता चल सकेगा।

इसलिए धमाके में किसी विशेष रसायन या विस्फोटक के इस्तेमाल की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

विस्फोटक अधिनियम समेत कई धाराओं में मुकदमा

मामले में इंदिरापुरम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसमें विस्फोटक अधिनियम, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े कानूनी प्रावधानों और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं को शामिल किया गया है।

पुलिस सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने वाले अकाउंट की प्रामाणिकता, घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और विस्फोट के संभावित कारणों की जांच कर रही है।

दिल्ली-यूपी में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ी

धमाके और कथित आतंकी संगठन के दावे के बाद दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है।

संदिग्ध वाहनों की जांच, पुलिस पिकेट पर निगरानी और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

जांच एजेंसियां किसी संभावित आतंकी साजिश के पहलू को भी खंगाल रही हैं, लेकिन फिलहाल ऐसी साजिश की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस आयुक्त बोले—हर पहलू पर चल रही जांच

गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त जे. रविंदर गौड़ के अनुसार, विस्फोट की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए गए हैं और सभी संभावित पहलुओं पर जांच की जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब दो प्रमुख सवाल हैं—पुलिस चौकी में धमाका किस कारण हुआ और सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने वाला संदेश वास्तविक है या किसी ने जांच को प्रभावित करने के लिए ऐसा दावा किया है।

इन सवालों के जवाब फॉरेंसिक रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मिल सकेंगे।

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