फरीदाबाद में फिर मिले आतंकी नेटवर्क से जुड़े तार, 30 वर्षों में कम से कम 18 बार सामने आईं संदिग्ध गतिविधियां

Must read

फरीदाबाद। पंजाब के जलालाबाद थाने पर हुए हैंड ग्रेनेड हमले के मामले में वांछित कुलवंत अली की गिरफ्तारी ने एक बार फिर फरीदाबाद में संदिग्ध आतंकी नेटवर्क की मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुलवंत को छांयसा इलाके की पंचायती झुग्गी से पकड़ा गया है। इस गिरफ्तारी के बाद जिले में पिछले तीन दशकों के दौरान सामने आए आतंकी साजिशों, संदिग्ध ठिकानों और स्थानीय संपर्कों से जुड़े पुराने मामले फिर चर्चा में आ गए हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले करीब 30 वर्षों में फरीदाबाद से कम से कम 18 बार ऐसी गतिविधियों के तार जुड़ने की जानकारी सामने आई है। अलग-अलग मामलों में संदिग्धों की गिरफ्तारी के साथ हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद किए जाने के दावे भी किए गए हैं।

कभी किराये के मकान, कभी मोबाइल और सिम कार्ड से मिले सुराग

फरीदाबाद में सामने आए पुराने मामलों की जांच के दौरान संदिग्ध गतिविधियों के अलग-अलग तरीके उजागर हुए हैं। कहीं आरोपियों के किराये के मकानों में रहने की जानकारी मिली तो कहीं मोबाइल फोन, सिम कार्ड और स्थानीय संपर्क जांच का हिस्सा बने।

इन मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने यह सवाल खड़ा किया कि दूसरे राज्यों में कथित आपराधिक या आतंकी गतिविधियों से जुड़े संदिग्धों का फरीदाबाद से संपर्क किस तरह स्थापित हुआ।

हालांकि अलग-अलग वर्षों में सामने आए इन मामलों को किसी एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा मानने के लिए ठोस जांच और प्रमाण आवश्यक हैं।

अलफलाह मेडिकल कॉलेज से जुड़े मामले में भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री बरामद

पिछले वर्ष 10 नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस की कार्रवाई के बाद अलफलाह मेडिकल कॉलेज से जुड़े एक कथित आतंकी नेटवर्क का मामला सामने आया था।

उस समय फरीदाबाद के धौज इलाके से करीब 360 किलोग्राम और फतेहपुर तगा के एक मकान से लगभग 2,563 किलोग्राम संदिग्ध विस्फोटक सामग्री बरामद होने की जानकारी दी गई थी।

मामले में डॉ. आदिल अहमद और डॉ. मुजम्मिल शकील सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

जांच में इस कथित नेटवर्क के तार दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार विस्फोट से भी जोड़े गए थे। उपलब्ध विवरण के अनुसार, डॉ. उमर नाम का व्यक्ति उस विस्फोट में मारा गया था। हालांकि पूरे नेटवर्क में अलग-अलग आरोपियों की भूमिका और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

राम मंदिर पर हमले की कथित साजिश में पाली से हुई थी गिरफ्तारी

चार मार्च 2025 को गुजरात पुलिस और हरियाणा एसटीएफ की संयुक्त टीम ने फरीदाबाद के पाली इलाके से अब्दुल रहमान को गिरफ्तार किया था।

उस पर अयोध्या स्थित राम मंदिर पर हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था।

इस गिरफ्तारी के बाद फरीदाबाद का नाम एक बार फिर दूसरे राज्य से जुड़े कथित आतंकी साजिश के मामले में सामने आया था।

सेक्टर-88 से पकड़ा गया था कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी देने का आरोपी

हाल ही में 17 अक्टूबर 2026 को ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-88 से राकेश हांडू को गिरफ्तार किया गया था।

वह जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी देने से जुड़े मामले में वांछित बताया गया था।

इस कार्रवाई ने भी फरीदाबाद में दूसरे राज्यों के मामलों से जुड़े संदिग्धों की मौजूदगी को लेकर चर्चा बढ़ाई थी।

कुलवंत अली की गिरफ्तारी के बाद फिर उठे सुरक्षा संबंधी सवाल

अब जलालाबाद थाने पर हैंड ग्रेनेड हमले के मामले में वांछित कुलवंत अली की छांयसा की पंचायती झुग्गी से गिरफ्तारी के बाद फरीदाबाद का नाम एक और गंभीर मामले से जुड़ा है।

पिछले वर्षों में सामने आई इन घटनाओं में संदिग्धों के ठिकानों, संपर्कों और बरामद सामग्री की प्रकृति अलग-अलग रही है। इसलिए सभी मामलों को आपस में जुड़ा हुआ मानना उचित नहीं होगा।

फिलहाल कुलवंत अली की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि गंभीर मामलों में वांछित लोग फरीदाबाद जैसे औद्योगिक और आवासीय क्षेत्र में किस तरह ठिकाना बना पाते हैं और उनकी गतिविधियों का पता जांच एजेंसियों को कब चलता है।

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article