नई दिल्ली। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के वकील दीपक नंदा उर्फ दीपक खत्री उर्फ मामा की मुश्किलें एक और मामले में बढ़ गई हैं। उत्तर प्रदेश के अमरोहा में दर्ज धोखाधड़ी और जालसाजी के केस में अदालत ने दीपक को 2 नवंबर को पेश करने के लिए प्रोडक्शन वॉरंट जारी किया है। आरोप है कि उसने 12वीं की कथित फर्जी मार्कशीट और प्रमाणपत्र के आधार पर बीए एलएलबी कोर्स में दाखिला लिया था।
दीपक फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। अमरोहा पुलिस उससे पूछताछ के लिए रिमांड पर लेना चाहती है। इसी सिलसिले में अदालत से प्रोडक्शन वॉरंट हासिल किया गया है। कोर्ट ने तिहाड़ जेल नंबर-4 के अधीक्षक को दीपक की निर्धारित तारीख पर पेशी सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।
यूनिवर्सिटी में दाखिले के दस्तावेजों पर उठे सवाल
जांच के मुताबिक दीपक ने अमरोहा जिले के गजरौला स्थित श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बीए एलएलबी की पढ़ाई की थी। वह 2019 से 2024 बैच का छात्र बताया गया है। आरोप है कि दाखिले के समय लगाए गए जम्मू-कश्मीर बोर्ड के 12वीं कक्षा के मार्कशीट और प्रमाणपत्र जांच में फर्जी पाए गए।
क्राइम ब्रांच ने 23 सितंबर को यूनिवर्सिटी प्रशासन को दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी दी थी। इसके बाद यूनिवर्सिटी की शिकायत के आधार पर 28 सितंबर को अमरोहा के रजबपुर थाने में दीपक के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
अब जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर है कि कथित फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज आखिर तैयार कहां और किसके जरिए कराए गए थे।
क्या फर्जी दस्तावेजों के पीछे बड़ा नेटवर्क? जांच में तलाशे जाएंगे जवाब
सूत्रों के मुताबिक यूपी पुलिस की टीम जम्मू-कश्मीर बोर्ड के कार्यालय पहुंचकर संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर चुकी है। दीपक से पूछताछ के दौरान पुलिस कथित फर्जी मार्कशीट और प्रमाणपत्र के स्रोत का पता लगाने की कोशिश करेगी।
जांच का दायरा केवल एक दाखिले तक सीमित रहेगा या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सामने आएगा, यह पूछताछ के बाद स्पष्ट हो सकेगा। एजेंसियां यह भी जांच सकती हैं कि क्या इसी तरीके से दूसरे लोगों के लिए भी शैक्षणिक दस्तावेज तैयार किए गए और क्या कथित फर्जीवाड़े के तार एक से अधिक राज्यों तक जुड़े हैं।
बताया जा रहा है कि रिमांड मिलने की स्थिति में पूछताछ में स्पेशल टास्क फोर्स की भूमिका भी रह सकती है।
अगस्त में दूसरे मामले में हुई थी गिरफ्तारी
दीपक नंदा पहले से ही एक अलग आपराधिक मामले में जेल में बंद है। विदेशी हथियारों की कथित सप्लाई से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट को लेकर 14 मार्च को मामला दर्ज किया गया था। क्राइम ब्रांच का दावा है कि इस नेटवर्क को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का समर्थन प्राप्त था। मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत भी कार्रवाई की गई है।
इसी मामले की जांच के दौरान दीपक नंदा को 26 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। अब अमरोहा में दर्ज कथित फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के मामले ने उसकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
फिलहाल 2 नवंबर को अदालत में पेशी के बाद यूपी पुलिस उसे रिमांड पर लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित फर्जी दस्तावेजों का स्रोत क्या था और इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका सामने आती है या नहीं।




