नई दिल्ली, 10 अगस्त। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को वर्ष 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़े धनशोधन मामले में मिली जमानत को चुनौती देने वाली प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार को अहम सुनवाई होगी। यह याचिका वर्ष 2024 में दाखिल की गई थी और न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है।
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 12 जुलाई 2024 को केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी थी। शीर्ष अदालत ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तारी की आवश्यकता और अनिवार्यता से जुड़े तीन महत्वपूर्ण सवालों को बड़ी पीठ के पास भेज दिया था।
ट्रायल कोर्ट ने 20 जून 2024 को दी थी जमानत
इससे पहले 20 जून 2024 को दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी थी। हालांकि, ED की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के इस आदेश पर रोक लगा दी थी।
बाद में 14 अक्टूबर 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने ED को मामले में अपनी दलीलें रखने का अंतिम अवसर दिया था। केजरीवाल की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने ED द्वारा बार-बार स्थगन लिए जाने का विरोध किया था। उनका आरोप था कि जांच एजेंसी बिना उचित कारण कार्यवाही को लंबा खींच रही है।
आबकारी नीति को लेकर क्या है मामला?
दिल्ली की 2021-22 आबकारी नीति को वर्ष 2022 में तत्कालीन उपराज्यपाल के निर्देश पर नीति के निर्माण और क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की CBI जांच के आदेश के बाद रद्द कर दिया गया था।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि आबकारी नीति में बदलाव के दौरान नियमों की अनदेखी की गई और कुछ लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसी मामले से जुड़े कथित धनशोधन की जांच ED कर रही है। अब हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ED की याचिका और केजरीवाल की जमानत से जुड़े पक्षों पर विचार करेगी।




