फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी से गुजरने वाली आगरा और गुरुग्राम नहरें अब लगातार बढ़ते हादसों और आत्महत्या की घटनाओं के कारण लोगों के लिए ‘डेथ कॉरिडोर’ बनती जा रही हैं। पुलिस के अनुसार वर्ष 2022 से अब तक इन दोनों नहरों में डूबने से 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हाल के महीनों में डॉक्टर, सिविल इंजीनियर, छात्रा और अन्य लोगों की आत्महत्या व हादसों में जान जाने के कई मामले सामने आए हैं। करीब 26 किलोमीटर लंबे नहर मार्ग पर 16 पुल बने हैं, लेकिन अधिकांश स्थानों पर ऊंची रेलिंग, सुरक्षा जाल, सीसीटीवी और पर्याप्त रोशनी जैसी व्यवस्थाओं का अभाव है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिल्ली की तरह सुरक्षा इंतजाम नहीं होने से हादसों और आत्महत्याओं का खतरा बढ़ गया है। पुलिस ने संबंधित विभागों को सुरक्षा उपाय बढ़ाने के लिए पत्र भेजे हैं, जबकि लोगों ने सभी पुलों पर सुरक्षा जाल, बैरिकेडिंग और निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
आगरा और गुरुग्राम नहर बनीं मौत का रास्ता, चार साल में 50 से ज्यादा लोगों की गई जान




