भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का मसौदा रविवार को जगदीशपुर (पुराना इस्लामनगर) में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। प्रस्तावित ड्राफ्ट में विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप, उत्तराधिकार और वसीयत से जुड़े कई अहम बदलाव किए गए हैं। मसौदे में ‘अवैध संतान’ शब्द हटाकर विवाह, लिव-इन, गोद लेने, सरोगेसी और एआरटी से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा देने का प्रस्ताव है। पत्नी को भी विवाह निरस्त कराने का अधिकार मिलेगा, जबकि अनुसूचित जनजातियों को पारंपरिक रीति-रिवाजों के आधार पर इसके दायरे से बाहर रखा गया है। प्रस्ताव के अनुसार बहुविवाह पर रोक रहेगी, शादी और तलाक का पंजीयन अनिवार्य होगा, मौखिक तलाक या गैर-कानूनी तरीकों से विवाह समाप्त नहीं माना जाएगा और निकाह हलाला के लिए मजबूर करना दंडनीय अपराध होगा। लिव-इन संबंधों का एक महीने के भीतर पंजीयन जरूरी होगा, नियमों के उल्लंघन पर जेल और जुर्माने का प्रावधान रहेगा तथा महिला पार्टनर को भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा। उत्तराधिकार संबंधी प्रावधानों में भी बदलाव करते हुए व्यक्ति को अपनी संपत्ति, पैतृक हिस्से सहित, वसीयत के जरिए किसी के नाम करने की छूट देने, मृत संतान की संपत्ति में माता-पिता दोनों को समान अधिकार देने और हत्या या हत्या में सहयोग करने वाले व्यक्ति को उत्तराधिकार से वंचित करने का प्रस्ताव रखा गया है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इस मसौदे को विधेयक के रूप में विधानसभा में पेश किया जाएगा।
मप्र में यूसीसी का ड्राफ्ट कैबिनेट के सामने, शादी, लिव-इन और उत्तराधिकार में बड़े बदलाव प्रस्तावित




