नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ गुजरात पुलिस द्वारा उनकी कविता ‘ऐ खून के प्यासे बात सुनो’ पर दर्ज FIR को रद्द कर दिया। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जोर देते हुए कहा कि कविता में हिंसा नहीं, बल्कि अहिंसा का संदेश है। कोर्ट ने पुलिस की संवेदनशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि 75 साल बाद भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व को समझने की जरूरत है, चाहे इसे नापसंद करने वाले कितने भी हों।
सुप्रीम कोर्ट से इमरान प्रतापगढ़ी को राहत, गुजरात पुलिस की FIR रद्द!
