इंदौर। महू के बडगोंदा थाना क्षेत्र में नाबालिग किशोरी के अपहरण मामले में पुलिस की लापरवाही पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए छुट्टी के दिन भी सुनवाई की और पुलिस को जमकर फटकार लगाई। 23 फरवरी को हुई घटना में पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पहले एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी की, यहां तक कि शिकायत लेकर पहुंचे चाचा के साथ मारपीट भी की गई, और बाद में केस दर्ज हुआ तो नामजद आरोपियों की जगह अज्ञात लिख दिया गया, जबकि परिवार लगातार पवन सिंह सहित अन्य आरोपियों के नाम बताता रहा। मजदूर पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि 6 अप्रैल को नाबालिग और सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद पुलिस ने बच्ची की तलाश में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता को भी कोर्ट की नाराजगी का सामना करना पड़ा। वहीं कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस का रवैया बदला नजर आया और टीम तुरंत पीड़िता के घर पहुंचकर जानकारी जुटाने लगी।
नाबालिग अपहरण केस में हाई कोर्ट सख्त, पुलिस को लगाई फटकार, 6 अप्रैल तक पेश करने का आदेश




