भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर विवाद अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है, जहां प्रदेश के 12 प्रमुख शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर “अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा” का गठन किया है और सरकार के खिलाफ सड़क से लेकर न्यायालय तक लड़ाई लड़ने की रणनीति बनाई है; शिक्षकों का कहना है कि यह मुद्दा केवल परीक्षा का नहीं बल्कि सेवा सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा है, वहीं मोर्चा ने 8 अप्रैल से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने और 18 अप्रैल को भोपाल में “मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा” निकालने का ऐलान किया है; संगठनों का आरोप है कि बिना स्पष्टता के जारी आदेश से करीब 1.5 लाख शिक्षक असमंजस में हैं, साथ ही वे सरकार से सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर करने और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आदेश को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं; शिक्षक नेताओं का कहना है कि 1995 से 2011 के बीच नियुक्त शिक्षकों पर अब नए नियम लागू करना अनुचित और कानूनी रूप से कमजोर है, जबकि सेवा अवधि की गणना और वरिष्ठता को लेकर भी स्पष्ट नीति की मांग तेज हो गई है।
टीईटी अनिवार्यता पर बढ़ा विवाद, शिक्षकों का संयुक्त मोर्चा आंदोलन पर उतरा




