भोपाल। राजधानी के जेपी अस्पताल में पिछले तीन साल से बंद प्रसव सुविधा का मामला अब सरकार के उच्च स्तर तक पहुंच गया है, जहां डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सीएमएचओ से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है; 2022 में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग और शिशु रोग विभाग को काटजू अस्पताल शिफ्ट किए जाने के बाद से जेपी अस्पताल में डिलीवरी पूरी तरह बंद है, जिससे मरीजों के साथ मेडिकल शिक्षा पर भी असर पड़ रहा है; सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन ने भी पत्र लिखकर बताया कि 39 में से 37 थानों के एमएलसी केस यहीं आते हैं, लेकिन केवल एक स्त्री रोग विशेषज्ञ होने से काम प्रभावित हो रहा है और गर्भवती महिलाओं व रेप पीड़िताओं को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा; रोजाना 50 से ज्यादा महिलाएं जांच के लिए आने के बावजूद इमरजेंसी में उन्हें काटजू अस्पताल रेफर करना पड़ता है, जिससे जोखिम बढ़ रहा है, जबकि पहले यहां रोज करीब 30 डिलीवरी होती थीं और पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, लेकिन उनका उपयोग नहीं हो पा रहा; दूसरी ओर काटजू अस्पताल में सीमित क्षमता और संसाधनों के कारण दबाव बढ़ गया है, वहीं डीएनबी कोर्स और मेडिकल छात्रों की ट्रेनिंग भी प्रभावित हो रही है; आईपीएचएस गाइडलाइन के अनुसार जिला अस्पताल में गायनी विभाग अनिवार्य होने के बावजूद सुविधा बंद होने से योजनाएं भी प्रभावित हैं, ऐसे में डिप्टी सीएम के हस्तक्षेप के बाद अब इस लंबे समय से लंबित मुद्दे पर जल्द निर्णय की उम्मीद जताई जा रही है।
जेपी अस्पताल में 3 साल से बंद प्रसव सुविधा पर सरकार सख्त, रिपोर्ट तलब




