नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, सफदरजंग हॉस्पिटल से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन जन औषधि केंद्रों को गरीबों के लिए सस्ती दवाओं का सहारा माना जाता है, वहीं अब आरोप लग रहे हैं कि यहां जेनेरिक दवाओं की जगह ब्रांडेड दवाएं बेची जा रही हैं।
अस्पताल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन मामला सिर्फ लापरवाही का है या फिर मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर मुनाफा कमाने का कोई बड़ा खेल चल रहा है, यह अब जांच के बाद ही साफ होगा।
सस्ती दवा का दावा, लेकिन हकीकत अलग
नियमों के मुताबिक जन औषधि केंद्रों पर केवल सस्ती जेनेरिक दवाएं ही मिलनी चाहिए। लेकिन एक एनजीओ की शिकायत के बाद सामने आया है कि सफदरजंग अस्पताल के कुछ केंद्रों पर मरीजों को ब्रांडेड दवाएं दी जा रही हैं।
शिकायतकर्ता ने सिर्फ आरोप ही नहीं लगाए, बल्कि दवाओं के बिल, पर्चियां और अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं, जो इस कथित गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं।
मरीजों पर बढ़ता आर्थिक बोझ
अगर आरोप सही हैं, तो इसका सीधा असर मरीजों की जेब पर पड़ रहा है। कई मामलों में वही दवा, जो जेनेरिक रूप में 10–20 रुपये में मिल सकती है, उसे 50–150 रुपये तक में बेचा जा रहा है।
उदाहरण के तौर पर:
| दवा का नाम | जेनेरिक रेट | वसूला जा रहा रेट (ब्रांडेड) | लूट का अंतर |
|---|---|---|---|
| विटामिन B कॉम्प्लेक्स | ₹16 | ₹59.13 | 4 गुना ज्यादा |
| ब्लड प्रेशर (Telmisartan) | ₹11 | ₹60.00 | 5 गुना से भी अधिक |
| थायरॉइड (Thyroxine) | ₹55 | ₹178.00 | भारी भरकम अंतर |
यानी मरीज यह सोचकर अस्पताल के अंदर से दवा खरीदते हैं कि उन्हें सस्ती मिलेगी, लेकिन कई बार उन्हें ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
भरोसे पर सवाल
अस्पताल आने वाले ज्यादातर मरीजों को यह भरोसा होता है कि जन औषधि केंद्र से दवा लेना फायदेमंद रहेगा। इसी कारण लोग बाहर की दुकानों की बजाय इन्हीं केंद्रों पर निर्भर हो जाते हैं। ऐसे में अगर वहां महंगी दवाएं बेची जा रही हों, तो यह भरोसे के साथ सीधा धोखा माना जा रहा है।
सिस्टम में खामी या जानबूझकर किया जा रहा खेल?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। कुछ जानकार इसे संभावित मुनाफाखोरी से भी जोड़कर देख रहे हैं, क्योंकि ब्रांडेड दवाओं में मार्जिन ज्यादा होता है। हालांकि, इस पहलू की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच शुरू करने की बात कही है और आश्वासन दिया है कि अगर आरोप सही पाए गए तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यही है कि क्या यह मामला कुछ केंद्रों तक सीमित है या फिर सिस्टम में कहीं गहरी समस्या है। फिलहाल, जांच के नतीजों का इंतजार है, जो यह तय करेंगे कि सस्ती दवा की योजना पर उठे ये सवाल कितने गंभीर हैं।
-साभार TV9 भारतवर्ष




