नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायिक प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को लेकर कहा कि इसे इस तरह शामिल किया जाना चाहिए जिससे व्यवस्था मजबूत हो, न कि न्याय प्रक्रिया कमजोर पड़े; कर्नाटक ज्यूडिशियल एकेडमी में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन-2026 के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि AI का उपयोग बड़े डेटा और रिकॉर्ड संभालने, पैटर्न पहचानने और मामलों में देरी कम करने के लिए होना चाहिए, लेकिन फैसले सुनाने का अधिकार केवल इंसानों के पास ही रहना चाहिए; उन्होंने कहा कि जजों को अपने निर्णय में तर्कशक्ति, अनुभव और विश्लेषण पर निर्भर रहना चाहिए और AI केवल एक सहायक उपकरण की तरह काम करे, दिशा हमेशा मानव बुद्धि ही तय करे; इस दौरान CJI ने कानूनी क्षेत्र में लैंगिक समानता पर भी जोर देते हुए सुझाव दिया कि सरकारी वकीलों और लीगल एड पैनल में कम से कम 50% महिलाओं को शामिल किया जाए, क्योंकि देश में न्यायिक अधिकारियों में महिलाओं की भागीदारी 45-50% तक पहुंच चुकी है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि करियर के आगे के चरणों में महिलाओं की भागीदारी घट जाती है, जिसके पीछे अनियमित कार्य समय, आर्थिक अस्थिरता और मुवक्किलों का कम भरोसा जैसे कारण जिम्मेदार हैं।
CJI सूर्यकांत का बयान, न्याय प्रणाली में AI पर सीमित भूमिका की वकालत




