नई दिल्ली। देश में धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश और लैंगिक समानता से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवादों पर सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने सुनवाई शुरू कर दी है, जो 7 अप्रैल से 22 अप्रैल तक 50 से ज्यादा लंबित याचिकाओं पर अंतिम निर्णय लेगी, इनमें सबसे प्रमुख मामला केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का है, जहां 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को चुनौती दी गई है, इसके अलावा मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, दाऊदी बोहरा समुदाय में महिला खतना और गैर-पारसी पुरुष से शादी करने वाली पारसी महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश जैसे मुद्दे भी शामिल हैं, कोर्ट इस दौरान धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार के बीच संतुलन जैसे संवैधानिक सवालों पर विचार करेगा, सबरीमाला विवाद 1990 से अदालतों में लंबित है और 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी, जिसके बाद व्यापक विरोध हुआ और मामला पुनर्विचार के लिए बड़ी बेंच को सौंपा गया, अब इस सुनवाई के फैसले से यह तय हो सकता है कि धार्मिक मामलों में अदालत के हस्तक्षेप की सीमा क्या होगी और महिलाओं के अधिकारों को किस तरह परिभाषित किया जाएगा।
धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू, 9 जजों की बेंच करेगी फैसला




