नोएडा इंजीनियर मौत मामला : एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची, गाड़ी की तलाश में जुटी

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नोएडा। नोएडा के सेक्टर-150 में हुए 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता के मौत मामले में मंगलवार को एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और गाड़ी की तलाश में जुटी गई। तलाशी अभियान में एनडीआरएफ की तीन टीमें लगाई गई है, जिसमें तीन गोताखोर भी शामिल हैं, जो 70 फीट गहरे बेसमेंट के अंदर जाकर गाड़ी की तलाश करेंगे। मौके पर फायर अधिकारी क्षेत्र के एसीपी सहित भारी पुलिस बल तैनात किए गए हैं। वहीं, दूसरी ओर इस मामले में सीएम योगी आदित्यानाथ द्वारा बनाई गई एसआईटी टीम नोएडा के सेक्टर 6 स्थित प्राधिकरण पहुंची और जांच की प्रक्रिया को शुरू किया। सेक्टर 150 के गहरे पानी में एनडीआरएफ की टीम पानी पर बिखरे हुए गाड़ी के तेल संहित अन्य सबूत को ध्यान में रखते हुए मृतक सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की ग्रांड विटारा गाड़ी को खोजने का काम कर रही है। यह प्रक्रिया अभी कई घंटे तक चलने की उम्मीद है। मौके पर लोगों की काफी भीड़ भी जमा हो गई है। इंजीनियर युवराज मेहता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि उन्होंने ठंडे पानी में दो घंटे तक मौत से संघर्ष किया। युवराज की मौत के पीछे केवल पानी नहीं, बल्कि सिस्टम की देरी और कड़ाके की ठंड भी थी। रिपोर्ट में इसे एंटीमॉर्टम ड्राउनिंग बताया गया यानी युवराज के फेफड़ों में पानी भरा पाया गया, जो इस बात का सबूत है कि डूबते समय उन्होंने बचने की पूरी कोशिश की। वह करीब दो घंटे तक पानी के बीच खड़ी कार की छत पर मदद का इंतजार करते रहे। कड़ाके की ठंड में पानी में भीगने के बाद उनकी हालत बिगड़ती गई और अंत में वह मौत से जंग हार गए। डॉक्टरों के मुताबिक, हाइपोथर्मिया और अत्यधिक घबराहट के कारण युवराज को कार्डियक अरेस्ट आया। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को पद से हटा दिया गया है। वहीं, ट्रैफिक सेल विभाग के जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार को सुरक्षा में चूक और लापरवाही के चलते तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया। साथ ही बेसमेंट निर्माण और यातायात सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। सीईओ लोकेश एम ने बिल्डर के आवंटन और निर्माण कार्य की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया है कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि अपने क्षेत्रों में सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं का सुरक्षा निरीक्षण दोबारा करें। आदेश में कहा है कि भविष्य में ऐसा होने पर जिम्मेदारी तय कर सीधे जेल भेजा जाएगा।

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